आईआरएस अधिकारी सचिन सावंत से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने उनपर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईडी ने अपने आरोप पत्र में दावा किया है कि कथित तौर पर एक दक्षिण भारतीय अभिनेत्री को उन्होंने 1.75 लाख रुपये के आभूषण उपहार में दिए थे। इतना ही नहीं, सचिन सावंत ने 'गलत तरीके से अर्जित धन' को परिवार के सदस्यों और दोस्तों के बैंक खातों के माध्यम से ठिकाने लगाया। ईडी ने आरोप पत्र में कहा कि अब तक की जांच से पता चला है कि आरोपियों ने आय के अवैध स्रोतों से 4.11 करोड़ रुपये कमाए। सचिन सावंत को इस मामले में जून में गिरफ्तार किया गया था। वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी ने मामले में सावंत और अन्य आरोपियों के खिलाफ हाल ही में एक विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष अपने आरोप दायर किए।
सावंत जनवरी, 2011 से अगस्त, 2020 तक सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क के संयुक्त आयुक्त थे। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर भारी संपत्ति अर्जित की। उनके पास 2.45 करोड़ की संपत्ति आय के कानूनी स्रोतों से अधिक है।
चार्जशीट के मुताबिक, ईडी को दिए अपने बयान में, सावंत के ड्राइवर ने दावा किया कि मलयालम सिनेमा की एक अभिनेत्री सावंत की 'प्रेमिका' थी और मुंबई में आईआरएस अधिकारी के साथ उसी इमारत में रहती थी। इसमें यह भी कहा गया है कि जब महिला कोच्चि चली गई, तो सावंत उससे 15 से 20 बार मिलने गए। साथ ही उसे 1.75 लाख रुपये की सोने की पायल उपहार में दी।
वहीं, सावंत ने जांच एजेंसी को दिए अपने बयान में कहा है कि अभिनेत्री उनकी करीबी दोस्त हैं, लेकिन उन्होंने उन्हें कभी कुछ नहीं दिया। साथ ही सावंत कहा कि उसने गुरुवयूर और मन्नारसला मंदिरों के दर्शन के लिए वे कई बार कोच्चि गए थे। वहीं, आरोप पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए सावंत के वकील विक्रम सुतारिया ने कहा कि अभी मामला विचाराधीन है। मेरे मुवक्किलों ने एक-एक पैसे का हिसाब दे दिया है। मेरे मुवक्किल को मौजूदा मामले में झूठा फंसाया गया है। उनका दक्षिण भारतीय अभिनेत्री से कोई संबंध नहीं है।
चार्जशीट में यह भी पता चला कि आय के अवैध स्रोतों से उत्पन्न धन आईआरएस अधिकारी के पिता, माता, भाई और परिवार के अन्य सदस्यों के बैंक खातों में जमा किया गया था। ईडी ने कहा कि इस पैसे में से कुछ का इस्तेमाल ऋण चुकाने और परिवार के सदस्यों और अन्य संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों के नाम पर चल और अचल संपत्ति खरीदने के लिए किया गया था।
इससे पहले, वर्ष 2008 बैच के आईआरएस अधिकारी सचिन सावंत को ईडी ने इसी साल जून में लखनऊ से गिरफ्तार किया था। सचिन पहले मुंबई में ईडी के जोनल कार्यालय में उप निदेशक के रूप में तैनात थे। आरोप है कि मुंबई में तैनाती के दौरान जनवरी 2011 से अगस्त 2020 तक जमकर कमाई की। उनकी आय में 204 प्रतिशत, यानी लगभग 2 करोड़ 45 लाख रुपये का इजाफा हुआ।
उन्होंने 1 करोड़ 2 लाख रुपए कैश देकर फ्लैट खरीदा। खुद की बनाई कंपनी के नाम पर कैश में फ्लैट खरीदा तो अपने पिता को कंपनी का निदेशक बनाया। बीएमडब्ल्यू कार खरीदी। सचिन सावंत का भाई पुलिस में जूनियर पद पर तैनात है तथा उनके पिता पुलिस विभाग से रिटायर हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि एक डायमंड कंपनी की 500 करोड़ की हेराफेरी में भी उनका नाम आया था। सीबीआई ने जून 2022 में मनी लॉड्रिंग का मुकदमा दर्ज कराया जिसमें उनका नाम आया था।