भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने शुक्रवार को नेस्ले इंडिया लिमिटेड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। मामला उत्पादों के प्रचार में किए गए कुछ दावों और एक प्रोडक्ट में पोषक तत्व की तय मात्रा से जुड़ा है। जिन उत्पादों को लेकर सवाल उठाए गए हैं, उनमें एनएएन एक्सेला प्रो 1,लैक्टोजेन प्रो 1 और नेस्ले का एक फॉलो-अप फॉर्मूला शामिल है।
उधर, नेस्ले ने अपने ऊपर लगे आरोपों को नकारा है। कंपनी के प्रवक्ता ने अमर उजाला को भेजे अपने बयान में कहा, "हमारे उत्पाद सभी लागू नियमों का पूर्णतया अनुपालन करते हैं। उक्त उत्पादों (नान एक्सेला प्रो और लैक्टोजेन प्रो) और उनके लेबल को एफएसएसएआई की विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुमोदित किया गया है। नोटिस के जवाब में, हमने लेबल पर दिए गए कथनों के संबंध में अधिकारियों को अपना विस्तृत जवाब पुनः प्रस्तुत किया है, जो तथ्यात्मक हैं और इनका वैज्ञानिक आधार है।"
एफएसएसएआई के कानूनी नोटिस के मुताबिक, एनएएन एक्सेला प्रो स्टेज 1 के प्रचार में ‘5 HMOs’ और ‘Whey Protein’ से जुड़े दावे किए गए थे। एफएसएसएआई ने इन दावों को लेकर नेस्ले इंडिया से स्पष्टीकरण मांगा। इसके बाद प्राधिकरण ने कहा कि प्रचार सामग्री फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (शिशुओं के पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) रेगुलेशन, 2020' के रेगुलेशन 4(2) के अनुरूप नहीं पाई गई। इस नियम के तहत शिशुओं के लिए बनाए गए खाद्य उत्पादों के प्रचार और ऐसे दावों पर कई तरह की पाबंदियां हैं, खासकर जब उनका उद्देश्य उत्पाद की बिक्री बढ़ाना हो।
एफएसएसएआई ने लैक्टोजेन प्रो 1 की प्रचार सामग्री की भी जांच की। बताया गया है कि इसके प्रचार में Whey Protein को आसानी से पचने वाला बताया गया था। एफएसएसएआई ने इस दावे पर भी नेस्ले से जवाब मांगा। प्राधिकरण के मुताबिक यह प्रचार भी 2020 के नियमों के रेगुलेशन 4(2) के तहत सवालों के घेरे में आया है।
एफएसएसएआई के अनुसार, दोनों प्रोडक्ट 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (शिशुओं के पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) रेगुलेशन, 2020' के रेगुलेशन 4(2) का उल्लंघन करते पाए गए। यह नियम शिशु आहार की बिक्री बढ़ाने के मकसद से किए जाने वाले प्रचार-प्रसार के दावों और सामग्री पर रोक लगाता है। रेगुलेटर ने 'इन्फैंट मिल्क सब्स्टिट्यूट्स, फींडिंग बॉटल्स एंड इन्फैंट फ़ूड्स (उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का नियमन) एक्ट, 1992' की धारा 3 का भी जिक्र किया, जो इनके विज्ञापन और प्रचार पर रोक लगाती है।
शिशुओं के लिए तैयार किए जाने वाले दूध और पोषण उत्पादों के लिए सामान्य खाद्य पदार्थों की तुलना में ज्यादा सख्त नियम हैं। इसकी वजह यह है कि ये उत्पाद बच्चों के विकास के बेहद महत्वपूर्ण समय में इस्तेमाल किए जाते हैं। भारत में शिशु आहार और दूध के विकल्पों के विज्ञापन और प्रचार पर इसलिए भी पाबंदियां लगाई गई हैं ताकि मार्केटिंग माता-पिता के बच्चों को दूध या भोजन देने से जुड़े फैसलों को प्रभावित न करे। एफएसएसएआई के नोटिस में शिशु दुग्ध विकल्प, दूध पिलाने की बोतलें और शिशु आहार अधिनियम, 1992 का भी जिक्र किया गया है। यह कानून शिशु दूध के विकल्प और कुछ शिशु खाद्य उत्पादों के विज्ञापन और प्रचार को नियंत्रित करता है।
तीसरा मामला प्रचार से नहीं, बल्कि उत्पाद में मौजूद एक पोषक तत्व की मात्रा से जुड़ा है। नोटिस के अनुसार, नेस्ले इंडिया द्वारा बनाए गए एक फॉलो-अप फॉर्मूला के नमूने की लैब जांच में बायोटिन की मात्रा निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं पाई गई। इसके बाद नमूने को दोबारा जांच के लिए रेफरल लैब भेजा गया। वहां भी नमूना 2020 के नियमों के तहत तय बायोटिन मानक के अनुरूप नहीं पाया गया। बायोटिन को विटामिन B7 भी कहा जाता है। यह शरीर की कई जरूरी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। बच्चों के पोषण उत्पादों में विभिन्न पोषक तत्वों की मात्रा पहले से तय मानकों के अनुसार रखना जरूरी होता है।
नोटिस के मुताबिक, इन तीन उत्पादों को लेकर नेस्ले इंडिया लिमिटेड के खिलाफ तीन अलग-अलग मामले दायर किए गए हैं। इनमें से दो मामले प्रचार में किए गए कथित दावों से जुड़े हैं, जबकि तीसरा मामला फॉलो-अप फॉर्मूला में बायोटिन की मात्रा से संबंधित है। अब संबंधित प्राधिकरण इन आरोपों और कंपनी के जवाब की जांच करेगा। इसके बाद ही तय होगा कि किसी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
नहीं। नोटिस में इन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाए जाने की बात नहीं कही गई है। एफएसएसएआई की ओर से कार्रवाई शुरू किए जाने का मतलब केवल यह है कि कथित नियम उल्लंघन की जांच और सुनवाई की जा रही है। इससे यह भी साबित नहीं होता कि इन उत्पादों का हर बैच असुरक्षित है। अंतिम स्थिति संबंधित प्राधिकरण के फैसले के बाद ही साफ होगी।
माता-पिता को केवल इस कानूनी नोटिस के आधार पर यह नहीं मान लेना चाहिए कि कोई प्रोडक्ट अपने आप असुरक्षित हो गया है। हालांकि, छोटे बच्चों के लिए फॉर्मूला मिल्क या अन्य पोषण उत्पाद चुनते या बदलते समय सावधानी बरतना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर इस बारे में बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर हो सकता है।