मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने मंगलवार को 16 साल बाद अनशन तोड़ दिया। उन्होंने शहद चखकर अनशन तोड़ा। इस मौके पर वह बेहद भावुक हो गईं और रोने लगीं। अनशन तोड़ने के बाद उन्होंने कहा कि वह मणिपुर की सीएम बनकर लोगों की सेवा करना चाहती हैं। 42 साल की इरोम ने वर्ष 2000 में सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम के खिलाफ अनशन शुरू किया था।
5 नवंबर सन 2000 वो आखिरी दिन था जब इरोम ने खाने का स्वाद चखा था। इंफाल के मालोम गांव में 10 लोगों के मारे जाने के बाद इरोम ने तब तक खाना न खाने की कसम खाई थी जब तक कि ये कानून खत्म नहीं कर दिया जाता। इरोम ने अभी अपने परिवार तक से अपने फैसले के बारे में बात नहीं की है। मानवाधिकार कार्यकर्ता बबूल लोइटोंगबम उन चंद लोगों में से हैं जो अस्पताल में नजरबंद शर्मिला से उनके नए फैसले के बारे में उनसे थोड़ी बहुत बात कर पाए।
वो बताते हैं, "इरोम को सुबह अस्पताल से 15 मिनट के लिए बाहर आने देते हैं ताकि उन्हें धूप मिल सके। उसी 15 मिनट में कुछ दिन पहले मैं भी अस्पताल पहुंचा, इरोम ने बताया कि वो चाहती तो उसी दिन भूख हड़ताल खत्म कर सकती थीं।"
#WATCH: Irom Sharmila ends her fast after 16 years. She was on hunger strike, demanding repealing of AFSPA.https://t.co/ndGmoEuZu8
— ANI (@ANI_news) August 9, 2016