इहाली ने कहा, 'बेशक, दोनों के राजनीतिक दृष्टिकोण के बीच मतभेद हैं। मुख्य बिंदु यह है कि ईरान को सऊदी अरब को स्वीकार करना चाहिए और सऊदी को ईरान को स्वीकार करना चाहिए। हम सऊदी और अन्य देशों को सम्मानपूर्वक देखते हैं। उनके आंतरिक मामले में दखल नहीं देना हमारी विदेश नीति का बुनियादी सिद्धांत है।'
भारत में ईरान के राजदूत इराज इहाली ने ईरान, सऊदी अरब और भारत को लेकर कई बातें कहीं हैं। उन्होंने कहा कि ईरान और सऊदी अरब इस्लामी दुनिया के दो स्तंभ हैं। एशिया के पश्चिम में दो शक्तियां हैं। दोनों देशों के बीच अलग-अलग समानताएं हैं।
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इहाली ने कहा, 'बेशक, दोनों के राजनीतिक दृष्टिकोण के बीच मतभेद हैं। मुख्य बिंदु यह है कि ईरान को सऊदी अरब को स्वीकार करना चाहिए और सऊदी को ईरान को स्वीकार करना चाहिए। हम सऊदी और अन्य देशों को सम्मानपूर्वक देखते हैं। उनके आंतरिक मामले में दखल नहीं देना हमारी विदेश नीति का बुनियादी सिद्धांत है।'
उन्होंने आगे कहा कि सऊदी अरब सुन्नी दुनिया में एक अग्रणी देश है। शिया दुनिया में ईरान एक अग्रणी देश है। इसलिए यह क्षेत्र को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा। आने वाले महीनों में दूतावास खुले रहेंगे और दोनों देशों के बीच संबंध फिर से शुरू होंगे और इससे क्षेत्र में विभिन्न संकटों में मदद मिलेगी।
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भारत को लेकर क्या बोले?
इहाली ने कहा, 'हम हमेशा भारत को अपने निर्यात को फिर से शुरू करने के लिए अपनी तत्परता व्यक्त करते हैं। यह भारत पर निर्भर है। मैं जो कहना चाहता हूं वह यह है कि प्रतिबंधों के तहत देशों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है। सभी देशों को सीखना चाहिए कि प्रतिबंधों के तहत कैसे जीना है अन्यथा वे अपने हितों को खो देंगे।'
उन्होंने आगे रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा, 'भारत को रूस की स्थिति का लाभ मिल रहा है और कोई भी भारत को दोष नहीं दे सकता है। भारत अपने राष्ट्रीय हित का पालन कर रहा है और ईरान भी अपने स्वयं के राष्ट्रीय हित का पालन करता है। हमने सीखा है कि प्रतिबंधों से कैसे निपटना है। न केवल तेल निर्यात में बल्कि धन हस्तांतरण में भी।'