ईरान ने चाबहार पोर्ट को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए बेहद अहम बताते हुए साफ कहा है कि इस परियोजना पर भारत और अन्य देशों के साथ सहयोग और बढ़ाया जाना चाहिए। नई दिल्ली में ईरान के राजदूत ने यह बयान ऐसे समय दिया है जब चाबहार पोर्ट को लेकर अमेरिकी प्रतिबंध नीतियों में हाल में बदलाव हुए हैं। इससे इस परियोजना के भविष्य और भारत की भागीदारी पर नई चर्चा शुरू हो गई है।
चाबहार पोर्ट पर ईरान का स्पष्ट रुख
नई दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली ने कहा कि चाबहार पोर्ट रणनीतिक और आर्थिक रूप से बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह बंदरगाह अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का बड़ा रास्ता बन सकता है। ईरान का मानना है कि इस परियोजना में भारत के साथ रिश्ते और मजबूत किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय व्यापार और संपर्क बढ़ाने में चाबहार की बड़ी भूमिका है।
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क्यों अहम है चाबहार परियोजना?
चाबहार पोर्ट परियोजना की परिकल्पना अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर की गई थी। इसका उद्देश्य भारत, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के बीच व्यापारिक रास्ता मजबूत करना है। यह मार्ग पाकिस्तान को बाईपास कर सीधी कनेक्टिविटी देता है। इसी कारण भारत के लिए यह परियोजना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। पोर्ट के जरिए माल ढुलाई और क्षेत्रीय व्यापार को नई गति देने की योजना है।
भारत की भागीदारी और समझौता?
केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि भारत की कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई के जरिए 2018 से चाबहार पोर्ट का संचालन कर रही है। 13 मई 2024 को कंपनी ने ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम संगठन के साथ 10 साल का करार किया। यह करार चाबहार पोर्ट के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को विकसित करने और चलाने के लिए है। समझौते के तहत भारत ने पोर्ट उपकरण खरीद के लिए 120 मिलियन डॉलर देने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी की है।
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अमेरिकी प्रतिबंध और छूट का मामला
अमेरिका ने 2018 में अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण को देखते हुए चाबहार परियोजना को प्रतिबंधों से छूट दी थी। लेकिन सितंबर 2025 में अमेरिकी विदेश विभाग ने यह छूट वापस ले ली। बाद में बातचीत के बाद सशर्त छूट को 26 अप्रैल 2026 तक बढ़ा दिया गया। भारत सरकार ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर सभी पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि भारतीय कंपनियों पर किसी तरह का दुष्प्रभाव कम किया जा सके।
ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता भी चर्चा में
ईरानी राजदूत ने ओमान के मस्कट में हुई ईरान और अमेरिका की परमाणु वार्ता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बातचीत का एक दौर हो चुका है और इसमें परमाणु मुद्दों पर चर्चा हुई है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची भी वार्ता में शामिल हुए। ईरान ने कहा है कि बातचीत के नतीजे का इंतजार किया जा रहा है। हाल के हफ्तों में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है और सैन्य टकराव की आशंका भी जताई जाती रही है।
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