ईरान ने रूसी ऊर्जा कंपनी गजप्रोम के साथ फरजाद बी गैस फील्ड को विकसित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किया।
इस समझौते से भारत और रूस के संबंधों पर भी प्रभाव पड़ेगा क्योंकि ये ईरान के तेल और गैस क्षेत्र के विकास में भारत की चल रही भागीदारी और निवेश को प्रभावित कर सकता है।
पिछले साल तेहरान में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी के बीच इस मुद्दे पर सकारात्मक बातचीत के बाद भी फरजाद बी के लिए व्यावसायिक अनुबंध को अंतिम रूप देने में भारत की विफलता की वजह से ईरान ने ये कदम उठाया है।
ईरान के तेल मंत्री बिजान जंगानेह ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में बताया कि फरजाद बी गैस फील्ड के अलावा ईरान ने रूसी कंपनी गजप्रोम के साथ दो और गैस फील्ड समझौते किए हैं।
गौरतलब है कि भारत और ईरान के आपसी संबंध काफी पुराने हैं। भारत ईरान का दूसरा बड़ा तेल आयातक देश हैं। जब ईरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम की वजह से प्रतिबंध लगा था तब भी भारत ने उसका साथ नहीं छोड़ा था और उससे तेल खरीदना जारी रखा था।