ईरान के महावाणिज्यदूत सईद रजा मोसयेब मोतलाघ ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच क्षेत्रीय स्थिरता स्थापित करने में प्रमुख वैश्विक शक्तियों, खासतौर पर भारत की रचनात्मक भूमिका की सराहना की है। मुंबई स्थित महावाणिज्यदूत ने कहा कि भारत ने चीन और रूस के साथ मिलकर सैन्य हस्तक्षेप की बजाय वैश्विक शांति की बहाली को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि इन तीनों प्रमुख शक्तियों से अपेक्षा है कि वे अमेरिका को युद्धोन्माद बंद करने के लिए अपना प्रभाव डालेंगे।
मोतलाघ ने कहा कि भारत, चीन और रूस ने अपने हितों को खतरे में डालने के बावजूद संघर्ष में हस्तक्षेप न करके यह दिखाया है कि वे शांति चाहते हैं। उन्होंने अमेरिकी हमले को उचित नहीं माना और न ही उसका समर्थन किया, न ही उन्होंने ईरान को सैन्य सहायता देने की स्थिति में खुद को रखा। बल्कि, उन्होंने शांति को बढ़ावा देने और आर्थिक बाजारों को स्थिर करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि इन शक्तियों ने जिम्मेदार वैश्विक हितधारकों के रूप में कार्य किया है, लेकिन अमेरिका की ओर से पारस्परिक सहयोग की कमी के कारण तनाव कम करने का मार्ग अभी भी बाधित है।
ईरानी राष्ट्रपति ने पुतिन से की बात
पाकिस्तान में अमेरिका के साथ शांति वार्ता विफल होने के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ टेलीफोन पर बात की। ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नवीनतम घटनाक्रमों की समीक्षा की। जिसमें क्षेत्र में युद्धविराम की वर्तमान स्थिति भी शामिल थी। क्रेमलिन ने रविवार को टेलीफोन पर हुई बातचीत का विवरण जारी किया, जिसमें क्षेत्र में राजनयिक समाधान के प्रति रूस की निरंतर प्रतिबद्धता का उल्लेख किया गया। व्लादिमीर पुतिन ने संघर्ष के राजनीतिक और राजनयिक समाधान की खोज को और सुविधाजनक बनाने तथा पश्चिम एशिया में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति प्राप्त करने के प्रयासों में मध्यस्थता करने की अपनी तत्परता पर बल दिया।
खामनेई की शोक सभा में शरीक हुए विदेश राज्य मंत्री मार्गेरिटा
विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने रविवार को नई दिल्ली में ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की याद में आयोजित शोक सभा में भाग लिया और भारत सरकार की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम ईरानी दूतावास द्वारा खामनेई के निधन के 40वें दिन (चेहल्लुम) पर आयोजित किया गया था। अयातुल्ला खामनेई का 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल के हमले में निधन हो गया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि पबित्रा मार्गेरिटा ने भारत सरकार की ओर से शोक व्यक्त किया और दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के संबंध गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क पर आधारित हैं। इससे पहले 5 मार्च को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भी नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास जाकर खामेनेई के निधन पर संवेदना व्यक्त की थी।