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केंद्रीय सुरक्षा बलों में 5 मार्च तक इस रैंक में प्रतिनियुक्ति पर नहीं आ सकेंगे आईपीएस

Thu, 09 Jan 2020 10:46 PM IST
Mohit Mudgal जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली 
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कॉडर अफसरों और आईपीएस अधिकारियों का विवाद कम होने की बजाए बढ़ता ही जा रहा है। वीरवार को कॉडर रिव्यू के मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई थी। अभी तक इस मामले में दो पक्ष अपनी बात रख रहे थे। एक, कॉडर अफसरों का और दूसरा पक्ष केंद्रीय गृह मंत्रालय का रहा है। पहले इस मामले में आईपीएस एसोसिएशन ने भी पार्टी बनने की इच्छा जताई थी, लेकिन कोर्ट ने उसे वैध संस्था नहीं मानते हुए ऐसा करने की इजाजत देने से मना कर दिया था।

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कोर्ट में अब करीब एक दर्जन आईपीएस अधिकारी यह कह कर पार्टी बन गए हैं कि वे अर्धसैनिक बलों में प्रतिनियुक्ति पर आना चाहते हैं। अदालत ने अब इस मामले की सुनवाई के लिए पांच मार्च का दिन तय किया है। तब तक किसी भी अर्धसैनिक बल में आईपीएस अधिकारी बतौर आईजी प्रतिनियुक्ति पर नहीं आ सकेंगे। डीआईजी के पदों पर भी कोर्ट का आदेश लागू होगा। मौजूदा समय में बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी में डीआईजी के 108 पद और आईजी के 20 पद खाली पड़े हैं।

बता दें कि सबसे पहले आईटीबीपी में आईजी के पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति पर बैन लगाया गया था। 23 अक्तूबर को पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आईटीबीपी के कॉडर रिव्यू को अंतिम रूप दिया गया था। इस बैठक के तुरंत बाद आईटीबीपी में नए पदों के सृजन का आदेश जारी कर दिया गया।कॉडर रिव्यू के तहत आईटीबीपी में एडीशनल डीजी के दो, आईजी के दस, डीआईजी के दस, कमांडेंट के 13, टू-आईसी के 16 और डिप्टी कमांडेंट के 9 पदों के सृजन को मंजूरी दे दी गई।
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इनके अलावा नॉन जीडी कॉडर में भी आईजी के दो पदों को स्वीकृति मिली। कॉडर अफसरों के मुताबिक, ऑर्गेनाइज्ड सर्विस कैडर की मौजूदा पॉलिसी के सभी नियमों के तहत नए सर्विस रूल बनाकर बल का कॉडर रिव्यू होना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नतीजा, बल के कुछ अधिकारी हाईकोर्ट पहुंच गए। हाईकोर्ट ने आईजी के पचास फीसदी नए सृजित पदों को डेपुटेशन के जरिए भरने पर रोक लगा दी है।

कोर्ट ने कहा, अगले आदेश तक आईटीबीपी में एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड पर कोई भी नियुक्ति डेपुटेशन से नहीं की जानी चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस एस.मुरलीधर और तलवंत सिंह की डिवीजन बेंच ने आईटीबीपी अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई की थी।वीरवार को भी इसी बैंच के सामने केस रखा गया।

सरकार ने स्टे हटाने का आग्रह किया तो कोर्ट ने कहा, क्या कोई इमरजेंसी है... 

मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने अर्धसैनिक बलों में प्रतिनियुक्ति पर आईपीएस अधिकारियों को उनके कोटे के पदों पर लगाने के लिए प्रतिबंध हटाने की गुहार लगाई। सरकारी पक्ष का कहना था कि मामले की सुनवाई चलती रहे, लेकिन प्रतिनियुक्ति की इजाजत दे दी जाए। अदालत ने कहा, इतनी जल्दी क्यों है।क्या कोई इमरजेंसी है।वीरवार को हुई सुनवाई में खास बात यह रही कि वहां दर्जनभर अफसर याचिका लगाकर इस मामले में कूद पड़े।उनका कहना था कि वे प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में काम करना चाहते हैं।

दूसरी ओर कॉडर अफसरों का आरोप है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने खुद सामने न आकर कथित तौर पर कुछ आईपीएस अधिकारियों को सामने कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में प्रतिनियुक्ति पर आने के लिए आईपीएस अधिकारियों की ऑफ़र लिस्ट में दर्जनभर नाम भी नहीं हैं। आरोप है कि आईपीएस अफसर फायदे के पदों पर ही आना चाहते हैं।विभिन्न अर्धसैनिक बलों में आईपीएस के लिए डीआईजी के 108 पद खाली पड़े हैं।

इनमें बीएसएफ 21, सीआरपीएफ 37, सीआईएसएफ 16, आईटीबीपी 10 और एसएसबी के 24 पद शामिल हैं।डीआईजी के पदों पर कोई आना नहीं चाहता। नतीजा, ये पद कॉडर अफसरों को पदोन्नति देकर भी नहीं भरे जा रहे हैं। इसी तरह आईजी के 20 पद, जो कि आईपीएस की प्रतिनियुक्ति से भरे जाने हैं, वे भी खाली हैं।इनमें बीएसएफ 5, सीआरपीएफ 7, आईटीबीपी 7 और एसएसबी एक पद शामिल है।सीआईएसएफ में एडीजी का एक और आईजी के तीन पद खाली हैं। 

इन खाली पदों को भर दिया जाए तो इतने अफसरों को मिल सकती है परमोशन... 

यदि 108 कमांडेंट को परमोशन देकर उन्हें डीआईजी बना दिया जाए तो ये सभी पद भरे जा सकते हैं।ऐसे में जब कमांडेंट डीआईजी बनेंगे तो इतने ही टूआईसी कमांडेंट बन जाएंगे। इसके बाद उतने ही डिप्टी कमांडेंट टूआईसी बन जाएंगे।इसी तरह 108 सहायक कमांडेंट, डिप्टी कमांडेंट के पद पर आ जाएंगे।

केंद्र सरकार पर लगाया टालमटोल करने का आरोप...

सीआरपीएफ के पूर्व आईजी वीपीएस पंवार कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद केंद्र सरकार टालमटोल की नीति पर चल रही है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के करीब दस हजार मौजूदा अफसर और सैकड़ों पूर्व अफसर परमोशन एवं वित्तीय फायदों में हुए भेदभाव को लेकर परेशान हैं। जिस तरह से केंद्र सरकार की दूसरी संगठित सेवाओं में एक तय समय के बाद रैंक या फिर उसके समकक्ष वेतन मिलता है, वैसा सभी केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारियों को नहीं मिल पा रहा है। करीब बीस साल की सेवा के बाद आईपीएस अधिकारी आईजी बन जाता है, लेकिन कॉडर अफसर उस वक्त कमांडेंट के पद तक पहुंच पाता है।

कॉडर अफसर 34-35 साल की नौकरी के बाद बड़ी मुश्किल से आईजी बनता है। डीओपीटी ने 2008-09 के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों में ओजीएएस यानी 'आर्गेनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस' के तहत सेवा नियम बनाने के आदेश जारी किए थे।अभी तक सीआरपीएफ, बीएसएफ और दूसरी कई सेवाओं में सर्विस रूल नहीं बनाए गए हैं। इतना ही नहीं, इन कॉडर अधिकारियों को समय पर गैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन (एनएफएफयू) और गैर-कार्यात्मक चयन ग्रेड (एनएफएसयू) का लाभ मिल जाए, इसके लिए आरआर यानी रिक्रूटमेंट रूल में भी संशोधन नहीं किया गया। नतीजा, आज बहुत से कॉडर अधिकारी परमोशन और आर्थिक फायदों से वंचित हैं। यही वजह है कि देश के पांच बड़े अर्धसैनिक बलों के अफसर अदालत में पहुंच गए हैं।

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