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IPS: केवल BSF-NSG के चीफ 'टाइटल शोल्डर-IPS' नहीं लगाते, बाकी CAPF डीजी के कंधों पर दिखता है 'आईपीएस'

सार

बीएसएफ डीजी के कंधे पर न तो आईपीएस लिखा जाता है और न ही बीएसएफ। डीजी की बेल्ट और जूतों का रंग भी काला होता है। सीएपीएफ में केवल बीएसएफ में ही यह परंपरा है। अन्य किसी भी फोर्स में आपको ऐसा देखने को नहीं मिलेगा। बीएसएफ में यह परंपरा 1970 से ही चली आ रही है।
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बीएसएफ और NSG महानिदेशकों के कंधे पर IPS नहीं - फोटो : एएनआई / अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में बीएसएफ के डीजी एकमात्र ऐसे शीर्ष अफसर हैं, जिनके कंधे पर बतौर 'टाइटल शोल्डर' आईपीएस नहीं लिखा होता। खास बात है कि 'टाइटल शोल्डर' के रूप में 'बीएसएफ' भी नहीं लिखा जाता। वह जगह खाली रहती है। यानी कोई 'टाइटल शोल्डर' नहीं। सीएपीएफ में 'एनएसजी' एकमात्र ऐसा बल है, जिसमें डीजी के कंधे पर आईपीएस की जगह 'एनएसजी' ही लिखा जाता है। बाकी केंद्रीय बलों के महानिदेशक अपने कंधे पर 'आईपीएस' ही लिखते हैं। हालांकि आईटीबीपी के पूर्व डीजी आरके भाटिया अपने कंधे पर 'टाइटल शोल्डर' के तौर 'आईटीबीपी' लिखते थे। उनके बाद अधिकांश डीजी, आईपीएस ही लिखते रहे हैं। केंद्रीय बल 'सीआरपीएफ', 'एसएसबी' और 'सीआईएसएफ' के महानिदेशकों के कंधों पर भी आईपीएस ही लिखा रहता है। 

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बीएसएफ डीजी के कंधे पर न तो आईपीएस लिखा जाता है और न ही बीएसएफ। डीजी की बेल्ट और जूतों का रंग भी काला होता है। सीएपीएफ में केवल बीएसएफ में ही यह परंपरा है। अन्य किसी भी फोर्स में आपको ऐसा देखने को नहीं मिलेगा। बीएसएफ में यह परंपरा 1970 से ही चली आ रही है। अमूमन 'टाइटल शोल्डर' आर्मी में एक रैंक के बाद नहीं लगाया जाता। बीएसएफ की जब स्थापना हुई तो बहुत सी बातें सेना के कायदे-कानूनों वाली अपनाई गई थीं। बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद बताते हैं, अगर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल 'सीएपीएफ' की बात करें, तो इनमें से केवल बीएसएफ के अफसरों को ही 'टाइटल शोल्डर' लगाने से छूट मिली है। हालांकि यह छूट कमांडेंट जो कि 'सिलेक्शन ग्रेड' में आ गया हो या फिर डीआईजी के पद से शुरू होती है। 

डीआईजी से लेकर डीजी तक चाहे कोई आईपीएस हो या कैडर अधिकारी, वे सब 'टाइटल शोल्डर' वाली जगह को खाली रखते हैं। दूसरे किसी भी बल जैसे सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी या सीआईएसएफ में ऐसा नहीं है। वहां डीजी तक के सभी अफसरों को अपने कंधे पर बतौर 'टाइटल शोल्डर' आईपीएस या बल का नाम लिखना होता है। मौजूदा समय में तो शीर्ष अफसर 'आईपीएस' ही लिखते हैं। 
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बीएसएफ में इसकी स्थापना के बाद से ही बल के पहले डीजी केएफ रुस्तम जी ने 'एकीकृत व्यवस्था' पर सबसे अधिक जोर दिया गया था। शुरुआत में तो आर्मी से इस बल में अफसर आए थे। उस वक्त आर्मी में यह परंपरा थी कि यूनिट कमांडर से बड़े रैंक वाले अफसर 'टाइटल शोल्डर' नहीं लगाएंगे। जैसे ग्रेनेडियर, जाट व गढ़वाल आदि नहीं लिखा होता। उनके साथ ही यही परंपरा बीएसएफ में चली आई। डीजी केएफ रुस्तम जी की सोच यह थी कि इस बल में अलग-अलग संगठनों से लोग आए हैं, इसलिए उनमें एकता और समन्वय की भावना होना बहुत जरूरी है। बीएसएफ में आए जवान और अधिकारी केवल अपनी फोर्स की बात करें, कोई और नहीं, उनकी इसी सोच के चलते बीएसएफ में भी आर्मी की परंपरा लागू हो गई।

1970 के दशक में बीएसएफ ज्वाइन करने वाले एसके सूद के अनुसार, कई आईपीएस अफसरों को 'टाइटल शोल्डर' न लगाने की बात खलती रही है। पूर्व डीजी डीके पाठक के समय में एक आईजी इस बात को लेकर अड़ गए थे कि वे आईपीएस हैं, तो वह अपने कंधे पर लिखेंगे। इसका कैडर अफसरों ने खासा विरोध किया था। हालांकि बाद में उक्त आईपीएस को कंधे पर टाइटल शोल्डर लिखने की अनुमति नहीं दी गई। इसी तरह विभिन्न बलों के अफसर ब्राउन कलर की बेल्ट लगाते हैं, लेकिन बीएसएफ डीजी को काले रंग की बेल्ट मिलती है। इसी तरह वह शूज भी काले रंग के पहनता है।

उनका डिजाइन भी वही रहता है, जैसे दूसरे अफसर पहनते हैं। ये सब बातें बल में एकता, सामंजस्य व सहयोग बनाए रखने के लिए होती हैं। नए डीजी राकेश अस्थाना ने भी लंबे दौर की परंपराओं को निभाया है। यह बल के लिए अच्छी बात है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 में हरियाणा के फरीदाबाद में आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों पर राज्यों के गृह मंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करने के दौरान "एक राष्ट्र, एक पुलिस वर्दी" का विचार प्रस्तुत किया था। उसके बाद केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में 'एक राष्ट्र, एक पुलिस वर्दी' पर काम शुरु हुआ था। 

जिस तरह बीएसएफ में सिपाही से लेकर डीजी तक एक जैसी बेल्ट और जूते हैं, वैसे ही दूसरे सुरक्षा बलों 'सीएपीएफ' मसलन, सीआरपीएफ, आईटीबीपी व एसएसबी आदि में भी वही पैटर्न लागू कर दिया जाए। इन बलों में अभी रैंक के मुताबिक, बेल्ट और जूते बदलने का नियम है। सीआरपीएफ ने इस संबंध में अपने एक पत्र के जरिए इन बलों की राय मांगी थी। सीआरपीएफ ने उसी साल आईटीबीपी को लिखे गए पत्र में कहा था कि सीएपीएफ में राजपत्रित अधिकारियों एवं अन्य पदाधिकारियों के जूते और बेल्ट के रंग में एकरुपता लाने के लिए अपनी राय दें। 

जिस तरह सीमा सुरक्षा बल 'बीएसएफ' में सभी जवानों और अधिकारियों की एक जैसी ड्रेस है, उसे अन्य बलों में भी लागू किया जा सकता है। बीएसएफ में काले रंग के जूते और काले रंग की बेल्ट इस्तेमाल होती है। इस बाबत आईटीबीपी महानिदेशालय से 28 नवंबर तक सुझाव देने का आग्रह किया गया था। बल के फ्रंटियर मुख्यालय ने इस पत्र को अपनी यूनिटों की तरफ बढ़ा दिया था। बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। सूत्रों का कहना है कि अधिकांश डीजी, इस बात पर सहमत दिखाई दिए कि उनके कंधों पर केवल आईपीएस ही लिखा जाए।

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