चीन से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के लद्दाख सेक्टर में 'ड्रैगन' लगातार विवाद पैदा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर युद्ध विराम नीति का उल्लंघन कर पाकिस्तान गोले बरसाने में लगा है। नेपाल से लगते बॉर्डर पर भी हलचल है। इन सबके बीच विभिन्न केंद्रीय सुरक्षा बलों में अफसरों के अनेक पद खाली पड़े हैं।
खासतौर पर भारत-चीन सीमा की चौकसी के लिए तैनात आईटीबीपी जैसी अहम फोर्स में आईजी (आईपीएस) के दस स्वीकृत पदों में से छह पद रिक्त हैं। डीआईजी के दस पद हैं, लेकिन तीन सितंबर तक इनमें से आठ पद भी नहीं भरे जा सके।
इतना ही नहीं, उक्त तारीख तक एडीजी के दो पदों में से एक पद खाली था। पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा में तैनात बीएसएफ का भी कुछ ऐसा ही हाल है। आईजी के लिए स्वीकृत 22 में से 9 पद अफसर नहीं आने के कारण खाली पड़े हैं।
बीएसएफ में डीआईजी के 26 पद मंजूर किए गए हैं, लेकिन अभी तक केवल तीन ही पद भरे जा सके हैं। नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी में आईजी का एक पद खाली है, जबकि डीआईजी के 25 में से 23 पद खाली हैं। देश के अधिकांश हवाई अड्डों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली सीआईएसएफ में डीआईजी आईपीएस के 20 पद स्वीकृत किए गए थे, लेकिन इनमें से केवल दो पदों पर ही ज्वाइनिंग हो सकी है।
बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद बताते हैं कि बॉर्डर सुरक्षा में तैनात किसी भी फोर्स को अपने अफसरों का कोटा पूरा रखना चाहिए। खासतौर से चीन सीमा पर जो हालात पैदा हुए हैं, उसके मद्देनजर आईटीबीपी में सभी अफसरों के पद भरे जाना जरूरी है। जब सीमा पर तनाव होतो है तो उस वक्त एकजुटता, समन्वय और त्वरित कार्रवाई देखी जाती है।
ऐसी स्थिति में हर एक पद का अपना खास महत्व होता है। जितनी अहमियत परिवहन विंग की है, उतनी ही संचार शाखा भी महत्वपूर्ण है। हथियार व गोला-बारूद के रखरखाव वाली शाखा और वेलफेयर ब्रांच के पास भी बड़ी जिम्मेदारी रहती है। बीएसएफ में तो रोजाना ही आतंकी और तस्कर पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती सीमा को पार करने की ताक में बैठे रहते हैं।
पाकिस्तान में तो इंटेलिजेंस एजेंसी, आतंकियों की घुसपैठ में मदद करती है। बीएसएफ में डीआईजी आईपीएस के 26 में से यदि 23 पद खाली हैं, तो यह चिंता का विषय है। इसमें कोई शक नहीं है कि खाली पदों के चलते किसी न किसी रूप में बॉर्डर की सुरक्षा कमजोर पड़ती है।
बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से जारी सीपीओ/सीएपीएफ रिपोर्ट 'स्वीकृत पद एवं रिक्तियां, में तीन सितंबर 2020 तक जो स्थिति दर्शाई गई है, उसके अनुसार सीआरपीएफ में भी बड़े पैमाने पर आईपीएस अफसरों के पद खाली हैं। इनमें एसडीजी के लिए स्वीकृत चार पदों में से दो, आईजी के 23 में से पांच और डीआईजी के 38 में से 23 पद खाली हैं। इनमें जो 15 पद भरे हुए हैं, वे भी इसलिए, क्योंकि उन्हें अस्थायी तौर पर कैडर अफसरों को दे दिया गया है।
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में आईपीएस डीआईजी को हार्ड पोस्टिंग पर काम करना पड़ता है, इसलिए उनका प्रयास रहता है कि वे अपने गृह राज्य में रहें या किसी मेट्रो सिटी में नियुक्ति मिल जाए। इसके चलते केंद्रीय सुरक्षा बलों में अफसरों की कमी होने लगती है।