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IPS in CPO: केंद्र सरकार में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के 212 पद खाली, SP-DIG को रास नहीं आ रही खुफिया एजेंसी

सार

केंद्रीय जांच एजेंसियों, पुलिस संगठनों और सीएपीएफ में डीआईजी व एसपी के अनेक पद खाली पड़े हैं। जून 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति आईपीएस के 678 पद स्वीकृत हैं। इनमें 212 पर खाली पड़े हैं।
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आईपीएस - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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केंद्र सरकार में विभिन्न राज्यों से प्रतिनियुक्ति पर आने वाले 'आईपीएस' अधिकारियों के लिए स्वीकृत पद अभी तक 'सौ' फीसदी नहीं भरे जा सके हैं। केंद्रीय जांच एजेंसियों, पुलिस संगठनों और सीएपीएफ में डीआईजी व एसपी के अनेक पद खाली पड़े हैं। जून 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति आईपीएस के 678 पद स्वीकृत हैं। इनमें 212 पर खाली पड़े हैं। डीआईजी के लिए स्वीकृत 254 पदों में से 63 पद रिक्त दिखाए गए हैं। एसपी आईपीएस के 221 पद स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 123 पद खाली हैं। खुफिया एजेंसी 'आईबी' में एसपी रैंक के 83 स्वीकृत पदों में से 51 पद रिक्त पड़े हैं। डीआईजी रैंक में 63 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 37 पद खाली हैं। 
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बता दें कि 23 जून 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र में आईपीएस डीजी के लिए बतौर प्रतिनियुक्ति 15 पद स्वीकृत किए गए हैं। ये सभी पद भरे हुए हैं। एसडीजी के 12 पद हैं, इनमें भी कोई पद खाली नहीं है। एडीजी लेवल पर 26 पद स्वीकृत हैं, इनमें दो पद खाली हैं। आईजी के 150 पद हैं, जिनमें से 24 रिक्त हैं। डीआईजी के लिए स्वीकृत 254 पदों में से 63 पद रिक्त दिखाए गए हैं। केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति एसपी आईपीएस के 221 पद स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 123 पद खाली हैं। सीबीआई में आईपीएस एसपी के स्वीकृत पदों की संख्या 73 है, जबकि इनमें से 55 पद खाली हैं।

इस साल फरवरी के पहले सप्ताह की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति आईपीएस डीजी के लिए 15 पद स्वीकृत थे। सभी पद भरे हुए थे। एसडीजी के 12 पदों में से कोई पद खाली नहीं था। एडीजी लेवल पर स्वीकृत 25 पदों में से केवल एक पद खाली था। आईजी के 149 पदों में से 27 पद रिक्त थे। डीआईजी के लिए स्वीकृत 256 पदों में से 68 पद रिक्त दिखाए गए थे। केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति एसपी आईपीएस के 221 पदों में से 126 पद खाली थे।  
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केंद्र में आईपीएस प्रतिनियुक्ति की एक मार्च 2024 की स्थिति देखें तो डीजी के लिए स्वीकृत 15 पदों में से दो पद खाली थे। एसडीजी के 12 पदों में दो पद रिक्त थे। एडीजी लेवल के 25 में से 3 पद रिक्त थे। आईजी के 149 पदों में से 30 पद रिक्त थे। डीआईजी के 256 पदों में से 70 पद रिक्त थे। केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति एसपी आईपीएस के 228 पदों में से 132 पद खाली थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय की तीन मार्च 2023 की स्थिति के अनुसार, विभिन्न केंद्रीय सुरक्षा बलों, आयोगों और जांच एवं खुफिया एजेंसियों में डीआईजी 'आईपीएस' के लिए 255 पद स्वीकृत थे, जिनमें से 77 पद खाली पड़े थे। इससे पहले खाली पदों की यह संख्या 120 से 186 के बीच रही है।

दिसंबर 2021 की स्थिति के अनुसार, आईपीएस डीआईजी के लिए 252 पद स्वीकृत थे, 118 पद रिक्त थे। इसी तरह एसपी 'आईपीएस' के लिए 203 पद मंजूर किए गए, लेकिन 104 पद खाली पड़े रहे। आईजी के लिए मंजूर 140 पदों में से 29 पद रिक्त थे। उस वक्त अनेक पद, जो भरे हुए दिखाए गए थे, वे आईपीएस से नहीं, बल्कि अस्थायी तौर से सीएपीएफ अधिकारियों के जरिए भरे गए थे। 

जुलाई 2020 की स्थिति के मुताबिक, केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति डीआईजी 'आईपीएस' के लिए 254 पद स्वीकृत थे। इनमें से 164 पद थे। आईजी 'आईपीएस' के लिए स्वीकृत 135 पदों में से 20 पद खाली पड़े थे। उस दौरान एसपी 'आईपीएस' के लिए स्वीकृत पदों की संख्या 199 थी, मगर इनमें से 97 पद रिक्त रहे। हैरानी की बात रही कि उस वर्ष बीएसएफ में आईपीएस डीआईजी के 26 पदों में से 22 पद खाली थे। सीआरपीएफ में ये पद 38 थे, जिनमें से केवल एक ही पद भरा हुआ था। सीबीआई में 35 में से 20 पद खाली थे, जबकि सीआईएसएफ में 20 में से 16 पद रिक्त थे। आईबी में आईपीएस डीआईजी के 63 में से 28 पद और आईपीएस एसपी के 83 में से 49 पद खाली रह गए थे।

चार साल पहले 17 पूर्व आईपीएस अधिकारियों ने सेवारत आईपीएस से केंद्र सरकार के तहत सेवा देने के लिए आगे आने की अपील की थी। पूर्व अफसरों ने कहा, आईपीएस को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आना चाहिए। उन्हें यहां पर विभिन्न जांच एजेंसियों और सुरक्षा बलों में काम करने का मौका मिलता है। वे समय रहते इन अवसरों का लाभ उठाएं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, केंद्र और राज्य सरकार के बीच संबंधों को मजबूत करती है। अखिल भारतीय सेवाएं ही सबसे महत्वपूर्ण सूत्र हैं जो भारतीय संघ और राज्यों को एक साथ जोड़ते हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारियों के रूप में हम आईपीएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आने के लिए प्रोत्साहित करने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के वृहद एवं सूक्ष्म स्तर पर योगदान के लिए भारत सरकार की पहल का समर्थन करते हैं। 

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आईपीएस, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को हल्के में न लें, इसके लिए केंद्र सरकार ने कई वर्ष पहले प्रतिनियुक्ति के नियम कुछ आसान बनाए थे तो वहीं अफसरों को चेताया भी था। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया था कि किसी आईपीएस को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए अनुमोदित किया जाता है और वह अपनी नियुक्ति लेने में विफल रहता है तो उसे पांच वर्ष की अवधि के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और विदेश में नियुक्ति/परामर्श से वंचित कर दिया जाएगा। आईपीएस अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति 'आईपीएस कार्यकाल नीति' के अंतर्गत शासित होती है। उक्त नीति के पैरा 17 के अनुसार, कोई अधिकारी, जिसे केंद्र सरकार के तहत किसी पद पर नियुक्ति के लिए अनुमोदित किया जाता है। यदि कोई आईपीएस अपनी नियुक्ति लेने में विफल रहता है तो उसे पांच वर्ष की अवधि के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और विदेश में नियुक्ति से वंचित कर दिया जाएगा। 
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केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक कमेटी ने सुझाव दिया था कि आईपीएस डीआईजी की प्रतिनियुक्ति के लिए पैनल प्रक्रिया को समाप्त कर दिया जाए। इसके पूरा होने में काफी समय लगता है। सरकार के इस कदम का मकसद, केंद्र में डीआईजी-रैंक के अधिकारियों की भारी कमी को दूर करना था। वह सुझाव मान लिया गया था। इसके बाद सरकार को यह उम्मीद जगी थी कि डीआईजी-रैंक के अधिकारियों के लिए पैनल सिस्टम को खत्म करने से अब प्रतिनियुक्ति पर अधिक आईपीएस केंद्र में आ सकेंगे। मनोनयन प्रक्रिया पूरी होने में करीब एक साल लग जाता था। केंद्र ने 'अखिल भारतीय सेवा' नियमों में संशोधन भी किया था। उसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार, आईएएस व आईपीएस अधिकारी को राज्य की अनुमति या बिना अनुमति के भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुला सकती है।
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