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सु्प्रीम कोर्ट में ईडी, चिदंबरम खुद को पीड़ित के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं

Wed, 28 Aug 2019 09:22 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पी चिदंबरम - फोटो : PTI
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सुप्रीम कोर्ट में आईएनएक्स मीडिया धन शोधन मामले में पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम को गिरफ्तारी से एक और दिन की राहत दी है। इसे लेकर आज भी सुनवाई हुई जिस दौरान ईडी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि चिदंबरम ने कानून बनने से पहले ही नहीं बल्कि बाद में भी मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया। इस मामले पर गुरुवार को फिर सुनवाई होगी। 
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प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि आईएनएक्स मीडिया धन शोधन मामले में अपनी गिरफ्तारी से जांच एजेंसी को रोकने के लिए पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम द्वारा खुद को पीड़ित के तौर पर पेश कर भय का माहौल पैदा करने की कोशिश की जा रही है। 

इसे धन शोधन का गंभीर मामला बताते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कहा कि उसने चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के लिए अकाट्य सामग्री जुटाई है। ईडी ने कहा कि दूसरे देशों और बैंकों से विदेश में संपत्ति, मकान, कंपनियों और जिन लोगों को वह जानते हैं, उनके बारे में उसे खास सूचना और खास विवरण मिले हैं। 

ईडी ने न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ को बताया कि उन्हें राजनीतिक विरोधी होने को लेकर प्रताड़ित नहीं किया जा रहा है, जैसा कि उनका (चिदंबरम का) आरोप है। 
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पीठ ने बुधवार को आईएनएक्स मीडिया धन शोधन मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को गिरफ्तारी से मिले अंतरिम संरक्षण की अवधि बृहस्पतिवार तक के लिए बढ़ा दी। धन शोधन का यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दर्ज किया है।

ईडी की तरफ से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वे इस चरण में जांच के दौरान संवेदनशील सामग्री चिदंबरम के साथ साझा नहीं कर सकते। मेहता ने कहा कि हम हिरासत में पूछताछ के दौरान आरोपी के सामने इसे रखेंगे। हमने उनके साथ चाय पीने के लिए आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि चिदंबरम खुद को पीड़ित के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। 

मेहता ने पीठ से कहा कि उन्हें राजनीतिक विरोधी होने को लेकर प्रताड़ित नहीं किया जा रहा है, जैसा कि उनका (चिदंबरम का) आरोप है। हमारे पास यह प्रदर्शित करने के लिए साक्ष्य हैं कि यह धन शोधन का एक गंभीर मामला है। मामले में हमने अकाट्य सामग्री जुटाई है। 
 

होता रहा अवैध लेनदेन

आज सुनवाई के दौरान सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने ईडी का पक्ष रखते हुए कहा कि भले ही चिदंबरम कह रहे हों कि कथित लेनदेन इसके गैरकानूनी होने से पहले का है, लेकिन हम बताएंगे कि कानून बनने के बाद भी अवैध लेनदेन (मनी लॉन्ड्रिंग) होता रहा। 

दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुनवाई

जस्टिस आर. भानुमति और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच चिदंबरम की अग्रिम जमानत रद्द करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही है। सुनवाई बुधवार को भी जारी रही जिसमें सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने ईडी का पक्ष रखा। चिदंबरम की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, अनुच्छेद-20 व 21 के तहत नागरिकों को मिले अधिकार को युद्ध और आपात काल के वक्त भी निलंबित नहीं किया जा सकता।

चिदंबरम के खिलाफ जिस धनशोधन कानून के उल्लंघन का आरोप बताया जा रहा है, वह कानून ही 2009 में बना, जबकि आरोप 2007-2008 के हैं। सिंघवी ने कहा कि एजेंसी द्वारा वांछित जवाब न देने का मतलब यह नहीं कि चिदंबरम ईडी के प्रश्नों से भाग रहे हैं।

अचानक कागज देकर हिरासत नहीं मांग सकते

चिदंबरम की पैरवी कर रहे दूसरे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से अनुरोध किया कि उनके मुवक्किल से पिछले साल 19 दिसंबर, एक जनवरी और 21 जनवरी, 2019 को की गई पूछताछ का लिखित ब्यौरा पेश करने के लिए ईडी को निर्देश दे। इससे पता चल जाएगा कि क्या चिदंबरम पूछताछ के दौरान जवाब देने से बच रहे हैं, जैसा कि ईडी आरोप लगा रही है। सिब्बल ने कहा कि ईडी अचानक पीछे से कोर्ट को दस्तावेज थमाकर चिदंबरम की हिरासत नहीं मांग सकता।

मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित : चिदंबरम

इस बीच, चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामा दाखिल कर इस मामले को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश हो रही है। उन्हें खलनायक के तौर पर पेश किया जा रहा है। उन्होंने सीबीआई द्वारा प्रताड़ित किए जाने की आशंका भी जताई है।
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