महिलाओं को पुरुषों के बराबर समान अधिकार दिलाने के लिए इन दिनों दुनियाभर में मुहिम चल रही है। मगर कंपनी के बोर्ड में महिला प्रतिनिधियों को शामिल करने की बात पर ज्यादातर कंपनियों का रुख नकारात्मक दिखाई देता है। इसी ट्रेंड को देखते हुए ब्रिटेन की इन्वेस्टमेंट एसोसिएशन और सरकार समर्थित संस्था हैंपटन-एलेक्जेंडर रिव्यू ने 69 कंपनियों को पत्र लिखा है। जिसमें कंपनी के बोर्ड में महिलाओं की संख्या बढ़ाने के लिए कहा गया है।
ब्रिटेन की 250 कंपनियां इन्वेस्टमेंट एसोसिएशन से जुड़ी हैं। इनके पास करीब 700 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। एसोसिएशन के मुखिया क्रिस कमिंग्स ने कहा, 'ज्यादातर कंपनियां महिलाओं को टोकन के तौर पर बोर्ड में रख लेती हैं। बहुत से शोधों से यह बात साबित हो चुकी है कि जेंडर डायवर्सिटी से कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर होता है। इसके बावजूद वह सुधार नहीं कर रही हैं। इसलिए उन्हें अगले साल 2020 तक का समय दिया गया है। यदि तब तक संख्या नहीं बढ़ती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।'
भारतीय कंपनियों में यह नियम है कि बोर्ड में कम से एक महिला जरूर होनी चाहिए। यह बात और है कि इस नियम का पालन महज खानापूर्ति के लिए किया जाता है। 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय कंपनियों में मौजूद 25 फीसदी महिलाएं कंपनी के मालिक की रिश्तेदार होती हैं। 26 जनवरी 2018 के आंकड़ों के अनुसार एनएसई में सूचीबद्ध 1723 कंपनियों में से 1667 के बोर्ड में कम से कम एक महिला मौजूद थी। इनमें से 425 कंपनियों में मौजूद महिलाएं कंपनी के मालिक की रिश्तेदार हैं।