कानपुर आईआईटी ने एक ऐसी हाथ घड़ी तैयार की है, जिससे कंपन से वक्त का पता चलता है। जैसे घंटे के लिए लंबा कंपन और मिनट के लिए छोटा। इसे दृष्टिबाधितों के लिए तैयार किया गया था, लेकिन इस प्रोजेक्ट के प्रमुख प्रोफेसर सिद्धार्थ पांडा का कहना है कि इसे आम लोग भी पहन सकते हैं।
देश में शोध और तकनीक का सबसे बड़ा मेला इनवेंटिव रिसर्च फेयर 2022 शनिवार को खत्म हो गया। इसमें 23 आईआईटी अपने 75 बड़े रिसर्च प्रोग्राम के साथ दो दिवसीय मेले में जमा हुई थीं। शनिवार को रिसर्च फेस्टिवल के दरवाजे आम लोगों के लिए खोले गए। आईआईटी दिल्ली के परिसर में आयोजित मेले को देखने करीब पांच हजार लोग पहुंचे, जिनमें कई दूसरे तकनीकी संस्थानों के छात्र भी थे। एक नजर उन रिसर्च प्रोजेक्ट पर जहां सबसे ज्यादा भीड़ जुटी और इंडस्ट्री ने भी काफी उत्साह दिखाया।
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लीथियम बैटरी का विकल्प
दुनियाभर में कई देश लीथियम की जगह सोडियम से बैटरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आईआईटी बॉम्बे ने अपने स्टॉल पर सोडियम आयन बैटरी से चलता पंखा लगाया। इस बैटरी की खासियत है कि इसे बनाने के लिए जरूरी सोडियम भारत में उपलब्ध है। दुनियाभर के देश लीथियम चीन से खरीदते हैं। सोडियम आयन बैटरी में आग लगने का खतरा भी नहीं रहता।
पराली की समस्या से निजात
दिल्ली के वायु प्रदूषण के लिए पंजाब-हरियाणा में जलने वाली पराली को जिम्मेदार ठहराया जाता है। इसका समाधान भी पंजाब की आईआईटी रोपड़ से सामने आया, जिसने पराली की मदद से हार्डबोर्ड तैयार किया है। यह देखने में बिल्कुल प्लाईवुड की तरह है। प्रोजेक्ट से जुड़े प्रोफेसर नवीन कुमार ने बताया, पराली मुफ्त में उपलब्ध है और बाकी कीमत जोड़ भी दें तो ये सामान्य हार्ड बोर्ड से चौथाई कीमत में तैयार हो सकता है।
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घड़ी ऐसी कि नजरिया बदल दे
कानपुर आईआईटी ने एक ऐसी हाथ घड़ी तैयार की है, जिससे कंपन से वक्त का पता चलता है। जैसे घंटे के लिए लंबा कंपन और मिनट के लिए छोटा। इसे दृष्टिबाधितों के लिए तैयार किया गया था, लेकिन इस प्रोजेक्ट के प्रमुख प्रोफेसर सिद्धार्थ पांडा का कहना है कि इसे आम लोग भी पहन सकते हैं। स्मार्टवॉच की तरह इसमें लैंग्वेज बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।
ड्रोन व मानव रहित हेलिकॉप्टर को देखने के लिए जुटी भीड़
इस मेले में सबसे ज्यादा भीड़ ड्रोन को देखने के लिए जुटी। आईआईटी बॉम्बे, दिल्ली, कानपुर अपने ड्रोन के साथ यहां मौजूद थे। लोगों को भारी वजन उठाने से लेकर खोजी ड्रोन तक देखने को मिले।
फेक न्यूज से लड़ेगा सॉफ्टवेयर
डीप फेक वीडियो इस वक्त पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। इससे फेक न्यूज तैयार की जाती है। आईआईटी जोधपुर ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया है जो डीप फेक वीडियो का झूठ फौरन पकड़ लेगा। प्रोफेसर मयंक वत्स का कहना है कि इसके नतीजे 95 फीसदी तक सही हैं।