क्या सोचकर यह मुद्दा उठाया था?
अकबरपुर सुंहेटी की महिला की हत्या हुई, उसमें पुलिस ने पीड़ित परिवार के लोगों को ही आरोपी बना दिया। दबिश के नाम पर महिलाओं से अभद्रता की गई। पुलिस का यह रवैया काफी दिन से बना था, बस तभी सोच लिया कि क्षेत्र के लोगों की बड़ी पीड़ा है और बात उठा दी।
क्या धर्मनिरपेक्ष छवि के विपरीत हो गए?
लंबे समय से कैराना क्षेत्र में राजनीति कर रहा हूं। जाति धर्म के नाम पर नहीं, बल्कि दोनों समुदाय के लोगों का समर्थन मिला। हर चुनाव में मुस्लिम भी मेरे साथ रहते हैं। आज भी दोनों समुदायों के लोगों से संबंध रखता हूं और उनके लिए कार्य करता हूं।
प्रशासन ने सूची में नाम गलत बताए हैं?
प्रशासन तो सत्ता के दबाव में है। अगर मान भी लें कि कुछ नाम सूची में गलत हैं, मगर पूरे 346 नाम तो गलत नहीं है। प्रशासन यह सोचे कि जो परिवार दहशत में कैराना छोड़ गए, उनके लिए प्रशासन ने क्या किया ? यदि प्रशासन दस व्यापारियों का पलायन दहशत में होना मानती है, तो उनको क्या मदद दी या सुरक्षा का भरोसा देकर पलायन से क्यों नहीं रोका गया।
चुनावी साल में ही मुद्दा क्यों उठाया?
रंगदारी न देने पर व्यापारियों की हत्या कर दी जाती है, सरकार ने व्यापारी के परिवारों को सुरक्षा तक नहीं दी। व्यापारियों के साथ ही अन्य लोगों पर भी अत्याचार हो रहे हैं, कब तक सहन किया जाता, अब नहीं रहा गया। ऐसा कतई नहीं कि चुनाव नजदीक होने की वजह से मुद्दा उठाया।
सूची में सिर्फ हिंदू ही नाम क्यों?
मुझे जिन लोगों के पलायन की जानकारी मिली, उनके नाम सूची में शामिल हो गए। उसमें हिंदू या मुस्लिम का जिक्र नहीं है, सिर्फ पीड़ितों के नाम हैं।
माहौल गरमाने का आरोप लग रहा ?
माहौल भाजपा, नहीं सपा गरमाना चाहती है। मेरी 40 साल की राजनीति में कभी कैराना में रंगदारी, हत्या और ऐसी वारदातें नहीं हुई। 12 साल मंत्री भी रहा हूं, कभी कैराना में दंगा नहीं हुआ। अब सपा सरकार में ही हालात बद से बदतर हो रहे हैं।