भारतीय योग क्रिया के विद्वानों का दावा रहा है कि योग के जरिये कई असाध्य रोगों को ठीक किया जा सकता है। योग के इस विचार को अब चिकित्सा की आधुनिकतम पद्धति एलोपैथी का भी समर्थन मिलता दिख रहा है। न्यूरो की चिकित्सा के लिए विख्यात दिल्ली के गोविन्द बल्लभ पंत अस्पताल (जीबी पंत अस्पताल) में मरीजों को सामान्य उपचार के साथ ही योग का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। अस्पताल का दावा है कि इससे मरीजों का बेहतर इलाज हो रहा है और बीमारी के बाद की परिस्थितियों के साथ वे ज्यादा आसानी से सामंजस्य बिठाने में सफल हो रहे हैं।
जीबी पंत अस्पताल में मरीजों को योग का प्रशिक्षण दे रहीं सुषमा सालमन ने अमर उजाला को बताया कि न्यूरो से संबंधित परेशानी में लोगों की समस्याएं मानसिक स्तर पर ज्यादा होती हैं। नाड़ी विशेष में रक्त प्रवाह में बाधा आने से भी लोगों को तरह-तरह की मानसिक परेशानी होने लगती है। योग के माध्यम से उनकी कोशिश इन रूकी नाड़ियों में रक्त की गतिशीलता को दोबारा स्थापित करने की होती है।
उन्होंने बताया कि जब मरीज उनके अस्पताल में आता है तो सबसे पहले आधुनिकतम चिकित्सकीय उपकरणों के द्वारा उसकी समस्या का पता लगाया जाता है और उसी के अनुरूप उसका इलाज शुरू किया जाता है। लेकिन एक निश्चित अवधि के बाद मरीजों को (डॉक्टरों की सलाह पर) योग का प्रशिक्षण भी दिया जाने लगता है। इससे उन्हें अपनी परेशानी से ज्यादा आसानी से और कम समय में पार पाने में मदद मिलती है।
प्राणायाम और अनुलोम-विलोम से लाभ
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जीबी पंत अस्पताल में सुषमा सालमन की सहयोगी एल्विना बताती हैं कि नर्व सिस्टम में आई किसी भी परेशानी से बचने के लिए वे मरीजों को प्राणायाम करना सिखाती हैं। अनुलोम-विलोम से 200 अलग-अलग तरह की बीमारियों को ठीक करने का दावा किया जाता है। अनुलोम-विलोम के द्वारा नर्व सिस्टम को भी ठीक करने में बेहद मदद मिलती है। यही कारण है कि वे मरीजों की शारीरिक क्षमता को देखते हुए इसे कम से कम 20 बार से जितना अधिक संभव हो, करने की सलाह देती हैं। इसके आलावा वे लोगों को ध्यान लगाने का प्रशिक्षण भी देती हैं। इससे लोगों को मानसिक शांति पाने में मदद मिलती है जो अंततः उनकी मानसिक परेशानी को जड़ से खत्म करने में मदद करती है।
एल्विना के मुताबिक कम उम्र के बच्चों में भी आजकल साइकियेट्री (मानसिक) समस्याएं देखने को मिल जाती हैं। इसके लिए हमारे टूटते परिवार और बदलता परिवेश जिम्मेदार है। बच्चे से लेकर युवा और बड़ी उम्र के लोग भी अपनी बात किसी अपने से करने के लिए परेशान हैं। उनकी यह मानसिक तड़प सही तरीके से सामने न आने के बाद बीमारी का रूप ले लेती है। यही कारण है कि वे अपने मरीजों को सबसे पहले खुश रहना सिखाती हैं, अपनी बात किससे, कब और किस तरह करनी है, यह बताती हैं। एल्विना का दावा है कि जैसे ही एक बार मरीज खुलने लगता है, उसकी आधी समस्या दूर हो जाती है। इसके लिए वे परिवार-दोस्तों के साथ पूरे परिवेश की भूमिका को महत्वपूर्ण मानती हैं।
इन आसनों से मिलती है मदद
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सुषमा सालमन और एल्विना के मुताबिक न्यूरोलोजी से जुड़ी समस्या में भुजंगासन, नौकासन, सेतु बंध आसन, योगनिद्रासन, पवनमुक्तासन और मर्कटासन विशेष लाभकारी होता है। इससे पीठ दर्द और न झुक सकने की समस्या से भी मुक्ति मिलती है।
स्वास क्रियाएं किसी भी परेशानी से उबरने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसको ठीक करने के लिए ॐ का तेज आवाज में उच्चारण बहुत मदद करता है। इसके आलावा लोगों को भ्रामरी (भंवरे के जैसी ध्वनी उत्पन्न करना) क्रिया करना चाहिए।
किसी भी आसन का पूर्ण लाभ लेने के लिए विशेष मुद्राओं का योगदान भी महत्वपूर्ण होता है। लोगों को पांच से 10 मिनट न्यूनतम ह्रदय मुद्रा में बैठना चाहिए। दावा है कि अगर हार्ट अटैक आने के लक्षण मिलते ही मरीज अगर हृदय मुद्रा में बैठ जाता है तो उसके हार्ट अटैक से बचने की संभावनाएं बहुत अधिक बढ़ जाती हैं। शरीर का बढ़ता वजन आज शहरी दुनिया की सबसे बड़ी बीमारी बन चुका है। वज्र आसन के द्वारा इससे भी मुक्ति पाई जा सकती है।
यहां आती है परेशानी
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अस्पताल के एक अन्य योग कर्मी ने बताया कि उनके यहां मुस्लिम समुदाय के मरीज भारी संख्या में आते हैं। वे उन्हें भी योग का प्रशिक्षण देते हैं। लेकिन अशिक्षा के कारण कुछ मरीज ॐ के उच्चरण को अपने धर्म के विरोध में मानते हैं। ऐसे में वे कुरआन के कुछ उन शब्दों का उच्चारण मरीजों से करवाते हैं जिनकी ध्वनी ॐ से मिलती जुलती है।
इसी तरह आसनों के समय भी उन्हें नमस्कार मुद्रा की बजाय नमाज की मुद्रा से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षित करते हैं। सभी योग कर्मियों का दावा है कि योग के जरिये उनके मरीजों को बहुत लाभ हो रहा है। इसका प्रमाण उनकी उस पुस्तिका में मिल जाता है जिसमें लाभ पाने के बाद मरीजों ने अपने तरह-तरह के अनुभव साझा किये हैं।