बीएसएफ के जवान पहाड़ों पर योगाभ्यास करते हुए
- फोटो : Amar Ujala
बीएसएफ के अधिकारियों का कहना है कि जब से सीमाओं पर योग शुरू हुआ है, जवानों को इच्छाशक्ति, संयम और एकाग्रता के बीच संतुलन बैठाने में बड़ी मदद मिली है। चूंकि योग का शरीर, मन व आत्मा को नियंत्रित रखने में अहम योगदान होता है, लिहाजा बीएसएफ ने भी नियमित योगासन कर इस अवस्था को काफी हद तक प्राप्त कर लिया है।
'सीमाएं हमारी जिम्मेदारी हैं पर हमारी जिम्मेदारी की कोई सीमा नहीं' इस नारे को पूर्ण रूप से चरितार्थ करने के लिए बीएसएफ के जवान नियमित योगासन करते हैं। बॉर्डर पर दुश्मनों से घिरे रहने वाले जवानों में आत्मविश्वास व बल, दोनों ही बातों का होना जरूरी है, ऐसे हालात में उनके लिए योग का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। केवल योग क्रियाएं हीं हैं जिसके माध्यम से ये प्रहरी अपनी दैनिक नित्य क्रियाओं के साथ-साथ पारिवारिक व सामाजिक जीवन के बीच सामंजस्य स्थापित कर पाते हैं।
बीएसएफ के जवान योगाभ्यास करते हुए
- फोटो : Amar Ujala
जवानों को योग की गहराई तक ले जाने और उसके शारीरिक एवं आत्मिक फायदों से अवगत कराने के लिए बीएसएफ ने अपने ट्रेनर को बड़े राष्ट्रीय योग संस्थानों से प्रशिक्षण दिलाया है। बल के ट्रेनर सीमा चौकी पर पहुंचकर जवानों को योगाभ्यास कराते हैं। राष्ट्रीय योग संस्थानों जैसे ‘पतंजलि योग विद्यापीठ’, ‘मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान’ और ‘ईष फाउंडेशन’ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से ट्रेनर का रेफ्रेशर कोर्स भी चलता रहता है।
21 जून को सीमा सुरक्षा बल अपनी सभी यूनिटों में योग कार्यक्रमों का आयोजन करेगा। इस दौरान योग की कार्यशालाएं, गोष्ठियां और निबंध-लेखन प्रतियोगिता कराई जाएंगी। सीमा चौकियों, नक्सल व हिंसा प्रभावित इलाकों में भी योग को अनिवार्य तौर पर लागू कर दिया गया है।