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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: न तो शरीर में खून है और न ही मिलता है पौष्टिक खाना, तो ऐसे कैसे मजबूत बनेंगी महिलाएं

Mon, 08 Mar 2021 07:11 PM IST
Harendra Chaudhary आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि देश के बहुत सारे राज्यों में महिलाएं रक्त की कमी से पीड़ित हैं। इसकी प्रमुख वजह है कि उनमें पौष्टिक भोजन की कमी का होना पाया गया है...
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Anemia Mukt vans - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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न तो पौष्टिक खाना मिल पा रहा है और न ही महिलाओं में पर्याप्त खून है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के बारे में महिलाओं को पता नहीं है। देश के कई राज्य ऐसे हैं जहां पर इन महिलाओं की जांच ना के बराबर हुई है। इन महिलाओं को ऐसी गंभीर बीमारी के बारे जागरूक तक नहीं किया गया है। ऐसी दशा में ये महिलाएं कितनी मजबूत होंगी और उनकी आने वाली पीढ़ियां कितनी ज्यादा मजबूती के साथ खड़ी हो सकेंगी इसे लेकर खूब सारे सवाल उठ रहे हैं।

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल में ही नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे जारी किया। इस सर्वे में महिलाओं की सेहत से संबंधित कई जानकारियां सामने आईं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि देश के बहुत सारे राज्यों में महिलाएं रक्त की कमी (एनीमिक) से पीड़ित हैं। इसकी प्रमुख वजह है कि उनमें पौष्टिक भोजन की कमी का होना पाया गया है।

गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया की पूर्व मेंबर डॉ. अलका सहगल बताती हैं कि अभी भी उनके पास ऐसी महिलाएं इलाज कराने के लिए आती हैं जो एनीमिक होती हैं। यानी उनमें पर्याप्त मात्रा में खून नहीं होता है और न ही उनको पौष्टिक आहार मिल पा रहा है। खास तौर पर गर्भावस्था के दौरान ऐसी महिलाओं की तादाद बढ़ जाती है। डॉक्टर सहगल कहती है कि ऐसी महिलाओं की देखरेख बेहद जरूरी होती है। खासतौर से तब जब हम पूरी दुनिया में उभरती हुई सबसे बड़ी ताकत के तौर पर सामने आ रहे हैं।
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गायनेकोलॉजिस्ट डॉ पुष्पा जायसवाल बताती है कि सिर्फ महिलाएं ही नहीं बल्कि किशोरियां भी कम उम्र में रक्त की अल्पता की बीमारी की शिकार है। उनको पौष्टिक आहार ना मिलने की वजह से ऐसी बीमारी गिर रही है। वे कहती हैं जब उनकी शादी होगी तो उसके बाद होने वाले बच्चे पर भी इसका असर पड़ता है।

डॉ. पुष्पा जायसवाल बताती है कि सिर्फ महिलाओं में पौष्टिक आहार और एनीमिया जैसी बीमारी ही प्रमुख नहीं है, बल्कि पढ़ी-लिखी लड़की और महिलाओं में भी गंभीर तरह की बीमारियां देखने को मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि खासतौर से वह महिलाएं जो देर रात तक काम करती हैं जिनके ऊपर अपने घर की जिम्मेदारी से लेकर ऑफिस का भी काम होता है, उनमें भी खाने-पीने की लापरवाही से एनीमिया और दूसरी अन्य बीमारियों की संभावनाएं बढ़ती रहती हैं। तो वक्त पर खाना ना खाने से और अधिक काम करने से उनका मेटाबॉलिज्म भी डिस्टर्ब हो रहा है।

पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स की महिला विंग की सदस्य नीतू पुरवार बताती हैं कि उनके संगठन की जुड़ी हुई महिलाएं अपनी सेहत को लेकर बहुत ज्यादा फिक्रमंद रहती हैं। उसकी वजह है कि उन्हें न सिर्फ घर चलाना होता है, बल्कि साथ-साथ इंडस्ट्री को भी आगे लेकर जाना होता है।

नीतू के मुताबिक जिम्मेदारों को इस दिशा में और ज्यादा कदम उठाने चाहिए ताकि हमारे आने वाली पीढ़ियां और महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा मजबूत बनाया जा सके। नीतू ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उनकी संस्था की ओर से देश के कई इलाकों में आज महिलाओं की ब्लड स्क्रीनिंग भी की गई और सेहत की जांच भी की गई, ताकि उन्हें किसी भी गंभीर बीमारी के होने से पहले बचाया जा सके।

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