फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

International Women's Day : 'स्तन कर' के विरोध में स्तन काटने वाली महिला को किया गया सम्मानित

Thu, 08 Mar 2018 12:26 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन

यह कहानी केरल की नंगेली की है, जिसने अमानवीय 'ब्रेस्ट टैक्स' के विरोध में अपने स्तन काट दिए थे। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर प्रतिष्ठित महिलाओं द्वारा राज्य में आयोजित कार्यक्रम में नंगेली को सम्मानित किया गया। केरल के इतिहास के पन्नों में छपी नंगेली की कहानी उस समय की है जब केरल के एक बहुत बड़े भाग में त्रावणकोर के राजा का शासन था। 

विज्ञापन


वहां शामिल प्रतिष्ठित महिलाओं में वकील एवं सक्रियतावादी आभा सिंह, मलिश्का और पर्यावरणविद एल्सी गैबरिल भी मौजूद थीं। सभी महिलाओं ने बहादुर महिला नंगेली की चौंका देने वाली सदियों पुरानी कहानी को याद किया। नंगेली अपने पति के साथ सदियों पहले केरल के चेरथाला क्षेत्र में रहती थीं। उस समय चेरथाला में निचली जाति की महिलाओं पर 'स्तन कर' लगाया गया था। उस समय जातिवाद की जड़ें बहुत गहरी थीं और महिलाओं को स्तन न ढंकने का आदेश था।

विज्ञापन

बताई नंगेली के संघर्ष की कहनी

बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में गैबरिल ने कहा अगर उस समय कोई गरीब और निचली जाति की महिला अगर किसी कपड़े से अपने स्तनों को ढंकती तो उसे त्रावणकोर के राजा को टैक्स देना पड़ता था। गैबरिल ने आगे बताया नंगेली ने यह कर देने से मना कर दिया और अपने स्तन भी ढंके। जिसके बाद राजा के कर संग्राहकों द्वारा उसका शोषण किया गया। इसके बाद नंगेली ने अपने स्तन काट दिए, ज्यादा खून बहने के कारण उसकी मृत्यु हो गई थी। 

आभा सिंह ने कहा कि यदि किसी नेता के मरने के बाद मार्ग और सड़कों का नाम उनके नाम पर रख दिया जाता है तो ऐसा उस बहादुर महिला के त्याग के बाद क्यों नहीं किया गया जिसने करीब 100 साल पहले क्रूर प्रणाली के खिलाफ लड़ाई की थी। मलिश्का ने कहा कि मैंने नंगेली की कहानी को मीडिया के जरिये जाना जिसे सुनकर मैं हैरान हो गई थी। 

नंगेली सांस्कृतिक फोरम की सचिव देवी के वर्मा ने कहा कि नंगेली ने व्यवस्था के खिलाफ तब लड़ाई छेड़ी थी जब कोई महिला आंदोलन नहीं था। वह इस सवाल के साथ खड़ी हुई कि आखिर उसे राजा को टैक्स क्यों देना चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें