यह कहानी केरल की नंगेली की है, जिसने अमानवीय 'ब्रेस्ट टैक्स' के विरोध में अपने स्तन काट दिए थे। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर प्रतिष्ठित महिलाओं द्वारा राज्य में आयोजित कार्यक्रम में नंगेली को सम्मानित किया गया। केरल के इतिहास के पन्नों में छपी नंगेली की कहानी उस समय की है जब केरल के एक बहुत बड़े भाग में त्रावणकोर के राजा का शासन था।
वहां शामिल प्रतिष्ठित महिलाओं में वकील एवं सक्रियतावादी आभा सिंह, मलिश्का और पर्यावरणविद एल्सी गैबरिल भी मौजूद थीं। सभी महिलाओं ने बहादुर महिला नंगेली की चौंका देने वाली सदियों पुरानी कहानी को याद किया। नंगेली अपने पति के साथ सदियों पहले केरल के चेरथाला क्षेत्र में रहती थीं। उस समय चेरथाला में निचली जाति की महिलाओं पर 'स्तन कर' लगाया गया था। उस समय जातिवाद की जड़ें बहुत गहरी थीं और महिलाओं को स्तन न ढंकने का आदेश था।