आंकड़ों पर नजर डालें तो अगर शहर के 20 से 30 फीसदी हिस्से पेड़ हैं तो एसी का खर्च 30 फीसदी तक कम हो जाता है वहीं 24 फीसदी पॉल्यूशन कम हो जाता है। जबकि शोर-शराबे को कम करने में भी पेड़ों का अहम योगदान होता है और यह 40 फीसदी तक शोर को कम करता है। जबकि धूल को पेड़ सोख लेते हैं और 75 फीसदी तक हवा में धूल का कण भी पड़ों की वजह से कम हो जाता है।
एक ओर जहां आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ट्वीट कर शुभकामनाएं दे रहे हैं वहीं आंकड़े उन राज्यों की पोल खोल रहे हैं। अगर मध्यप्रदेश की बात करें तो आंकड़े बताते हैं कि 20 साल पहले जहां वन क्षेत्र 66 फीसदी था जो अब घटकर 22 फीसदी रह गया है। जबकि सूबे के मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीट में 2017 में 6.6 करोड़ पेड़ लगाए जाने की बात कही है।
जबकि हैदराबाद में यह आंकड़ा 2.7 से घटकर 1.6.6 फीसदी रह गया है। जबकि मुंबई में यह आंकड़ा 34 फीसदी से घटकर 13 फीसदी, कोलकाता का यह आंकड़ा डराता है। यह 23.4 से घटकर 7.3 फीसदी और अहमदाबाद में भी पेड़ों की कटाई 50 फीसदी से ज्यादा हुई है। यह भी 46 फीसदी से घटकर 24 फीसदी रह गया है।