दुनिया भर के चुनाव प्रबंधन निकायों-ईबीएम का दो दिन का सम्मेलन शुक्रवार को दिल्ली घोषणा पत्र स्वीकार करने और एक कार्य समूह के गठन पर सहमति के साथ ही समाप्त हो गया। इसमें वैश्विक चुनाव वर्ष 2024 लोकतांत्रिक स्थानों की पुनरावृत्ति और ईबीएम के लिए महत्वपूर्ण बाते विषय पर दुनिया भर के चुनाव प्रबंधन प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे।
दिल्ली घोषणा पत्र में फर्जी खबरों, भ्रामक सूचनाओं के लिए एक मैकेनिज्म पर काम करने के लिए एक कार्य समूह के गठन किया जाएगा। इसका लक्ष्य फर्जी खबरों को नियंत्रित करने, भ्रामक सूचनाओं को तंत्र को नियमित करने और सही जानकारी देने के लिए काम करेगा। इतना ही नहीं इस घोषणा पत्र में बड़ी तकनीकी कंपनियों की जवाबदेही और उनके साथ मिलकर काम करने पर भी सहमति बनी है।
इस मौके पर भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त और ईएमबी के प्रमुख मॉरीशस के मुख्य चुनाव आयुक्त अब्दुल रहमान ने कहा पारदर्शी और स्वच्छ चुनाव कराना दुनिया के देशों की प्रतिबद्धता है। चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने और संबंधित देशों के कानूनों के तहत चुनावी संचालन के लिए बनाए जाने वाले फर्जी आख्यानों का सख्ती के साथ विरोध करेंगे। चुनाव प्रबंधन पर सभी देश द्विपक्षीय और सामूहिक रुप से एक दूसरे के साथ सहयोग का संकल्प लेते हैं।
सम्मेलन के अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि पूरा सोशल मीडिया प्लेटफार्म प्रदूषित है। अगर हमारे बाहर पर्यावरण प्रदूषण है, तो हमारे अंदर भी उतना ही गंभीर सोशल मीडिया प्रदूषण है। इसके लिए प्रदूषण विरोधी उपायों की जरूरत है। सोशल मीडिया कंपनियों को बहुत देर होने से पहले आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जो स्वतंत्र अभिव्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण स्थान प्रदान करने में सहायक रहे हैं, खासकर उन आवाजों के लिए जिन्हें सुना नहीं गया है, उन्हें फर्जी, असत्यापित और भ्रामक कहानियों की छाया से धुंधला नहीं होने देना चाहिए। यह उनके अपने हित में है कि बहुत देर होने से पहले फर्जी अव्यवस्था का पता लगाया जाए और उसे रोका जाए। लोकतंत्र को बनाए रखने से ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी है। लोकतंत्र को बाधित करने वाली ताकतों की सहायता न करें, यहींअभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी मूल सिद्धांत है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि ईएमबी को इन चुनौतियों का प्रबंधन करने के लिए एक रूपरेखा तैयार करनी चाहिए और उसे अपनाना चाहिए। वोट डाले जाने के बाद भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया जारी रहती है। प्रक्रिया में मतदाता का विश्वास अटूट है। यह वह आधार है, जिस पर लोकतंत्र पनपता और विकसित होता है। चुनावों को बदनाम करने के लिए प्रेरित हितों के कई उदाहरण सबके सामने हैं।
यह भविष्य के चुनावों में कई लोकतंत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है। चुनाव के बाद के विवाद, अगर गलत तरीके से निपटाए गए, तो लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास को खत्म कर सकते हैं। समय पर पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से उनका समाधान करना लोकतांत्रिक वैधता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके लिए मजबूत न्यायिक निगरानी आवश्यक है, और चुनावी प्रक्रिया की जवाबदेही के लिए वैध मंच उपलब्ध होना चाहिए।
एंथनी बैनबरी ने भी दी प्रतिक्रिया
इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर इलेक्टोरल सिस्टम्स के अध्यक्ष और सीईओ एंथनी बैनबरी ने भी दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण और सफल सम्मेलन था। चुनावों और चुनौतियों के बारे में बात करें तो आज के जमाने में चुनाव प्रबंधन निकाय इनका सामना कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, गलत सूचना, दुष्प्रचार के प्रभाव के बारे में भी बात की गई। हम उन अवसरों के बारे में भी बात कर रहे हैं जो नई टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ला सकती है। इससे चुनावों का भविष्य क्या होगा।"
उन्होंने आगे कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने चर्चा के लिए विषयों का एक बहुत ही दिलचस्प कार्यक्रम आयोजित किया। हम सभी को एक-दूसरे से सीखने और अनुभवों को साझा करने का मौका मिला, इससे हमें लाभ भी मिला। यह एक बहुत ही सफल सम्मेलन था।