International Big Cat Alliance: केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (आईबीसीए) आधिकारिक तौर पर संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन बन गया है। एक बयान में कहा गया कि 23 जनवरी तक, IBCA और इसके सचिवालय को पूर्ण अंतरराष्ट्रीय कानूनी दर्जा प्राप्त हो गया है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि बिग कैट यानी बाघ व बड़ी बिल्ली प्रजाति के अन्य जानवरों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय बिग कैट अलायंस (आईबीसीए) आधिकारिक तौर पर एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन बन गया। 3 जनवरी 2025 को आईबीसीए और उसका सचिवालय पूरी तरह से समझौता आधारित अंतर सरकारी अंतराष्ट्रीय संगठन बन गया है। अब यह एक कानूनी अंतरराष्ट्रीय इकाई है।
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इस फ्रेमवर्क समझौते के तहत भारतीय विदेश मंत्रालय को मुख्य अमानतदार बनाया गया है। मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले पांच देशों निकारागुआ, एस्वातिनी, भारत, सोमालिया और लाइबेरिया ने समझौते के अनुच्छेद 8 (1) के तहत अपनी मंजूरी उसे प्रेषित कर दी है। भारत समेत 27 देशों ने आईबीसीए में शामिल होने की हामी भरी है और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी आईसीबीए से जुड़ने की इच्छा जताई है। जिन पांच देनों ने अपनी आधिकारिक मंजूरी का पत्र सौंपा है वे इस समझौते में औपचारिक रूप से शामिल हैं।
भारत में है मुख्यालय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 अप्रैल 2023 को प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल पूरे होने पर आईबीसीए लॉन्च किया था। 29 फरवरी 2024 को अपनी बैठक में केंद्रीय कैबिनेट ने आईबीसीए की स्थापना को मंजूरी दी थी जिसके तहत इसका मुख्यालय भारत में बनाया जाना था।
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क्या है बिग कैट?
इस अभियान का लक्ष्य बड़ी बिल्ली प्रजाति के सात जानवरों बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा का संरक्षण करना और उन्हें बचाना है। लक्ष्य है कि संयुक्तराष्ट्र के सभी सदस्य देशों को इसका भी सदस्य बनाया। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी को नोडल संगठन बनाते हुए आईबीसीए की स्थापना की गई है।