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दुनिया भर के म्यूजियम विशेषज्ञ तैयार कर रहे हैं देश का पहला लाइव गंगा म्यूजियम प्रोजेक्ट

Thu, 29 Nov 2018 08:39 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रो.डॉक्टर हेन्स जोर्ज चेक - फोटो : Amar Ujala
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भारत में लाइव गंगा म्यूजियम प्रोजेक्ट बनाने के लिए दुनिया भर के विशेषज्ञ दिल्ली पहुंचे हैं। चूंकि यह देश का पहला अनूठा प्रोजेक्ट है, इसलिए केंद्र सरकार ने वैश्विक स्तर पर इसके लिए सुझाव मांगे हैं। जर्मनी के हेम्बर्ग म्यूजियम के डायरेक्टर प्रो. डॉक्टर हेन्स जोर्ज चेक का कहना है कि भारत में गंगा म्यूजियम केवल कुछ वस्तुओं का संग्रह नहीं होगा, बल्कि यह लोगों की अलग-अलग भावनाओं से जुड़ी बातों एवं परंपराओं के समन्वय के तौर पर रहेगा। चूंकि गंगा यहां के जन-जन में बसती है तो केवल एक म्यूजियम से काम नहीं चलेगा। इसके लिए उन राज्यों में भी म्यूजियम बनाए जाने जरुरी हैं, जहां से गंगा का प्रवाह होता है।

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डॉक्टर हेन्स जोर्ज चेक ने कहा, अहम बात है कि लोग गंगा के साथ मन से जुड़े। उसकी स्वच्छता और प्रवाह का ध्यान रखें। कई देशों में नदी को लेकर म्यूजियम बने हैं। उनकी अपनी-अपनी खासियत है। हम लाइव म्यूजियम के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इसका मतलब है कि गंगा म्यूजियम ऐसा न हो कि वहां पर कुछ फोटो, वीडियो या अन्य कोई दुर्लभ कलाकृति जो गंगा से जुड़ी हो, उसे रख दें, नहीं ऐसा तो बिल्कुल नहीं होगा। जिस तरह से गंगा निरंतर बहती रहती है, उसकी तर्ज पर ही म्यूजियम बनेगा। उसमें निरंतर बदलाव होते रहेंगे।

दिल्ली में सेंट्रल म्यूजियम तो राज्यों में क्षेत्रीय स्तर पर गंगा म्यूजियम बनाने पर विचार...
नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा एनएमसीजी के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा का कहना है कि लाइव म्यूजियम गंगा के किनारे पर ही बने, हम इस प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक सेंट्रल म्यूजियम और जहां से गंगा बहती है, उन राज्यों में क्षेत्रीय स्तर पर म्यूजियम बनाने पर विचार कर रहे हैं।
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ये सभी म्यूजियम गंगा के किनारे पर ही बनें, हम ऐसा प्रयास करेंगे। अगर संबंधित राज्य इसके लिए जमीन उपलब्ध करा देता है तो एनएमसीजी म्यूजियम के प्रोजेक्ट का खाका तैयार कर देगा। हरिद्वार, भागलपुर, वाराणसी, गाजीपुर, बक्सर, इलाहाबाद, बलिया, कानपुर, पटना और कोलकाता आदि जगहों पर क्षेत्रीय म्यूजियम बनाए जा सकते हैं। तीन दिवसीय वर्कशॉप में डेन्यूब, राइन और हैंबर सिटी म्यूजियम सहित दुनियाभर के दर्जनों विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है।
 

गंगा म्यूजियम केवल देखने के लिए नहीं, सीखने, समझने और योगदान देने वाला हो: मार्टिना बुकार्ड 

मार्टिना बुकार्ड - फोटो : Amar Ujala
जर्मनी से आई जीआईजेड की प्रोग्राम हेड मार्टिना बुकार्ड ने कहा, गंगा म्यूजियम दूसरे म्यूजियम की तरह न हो। अर्थात उसमें केवल गंगा से जुड़ा साहित्य या तस्वीरें ही न हों, बल्कि वह लोगों को सिखाने वाला हो, समझाने वाला हो और म्यूजियम से प्रभावित होकर लोग गंगा की स्वच्छता में अपना कुछ योगदान दें, ऐसा प्रोजेक्ट बनना चाहिए। म्यूजियम देखने के बाद हर व्यक्ति गंगा से जुड़ जाये। 

अतीत में गंगा का वह रुप दोबारा से कैसे वापस लाया जाए, जो लोग गंगा से कनेक्ट नहीं हैं, वे फिर से इसके पास आएं, देश के पहले म्यूजियम का यही मकसद होगा। सेंट्रल म्यूजियम के अलावा गंगा के किनारे पर स्थित दूसरे शहरों में भी छोटे-छोटे म्यूजियम बनाए जाएं। वहां पर महिलाओं और विद्यार्थियों के समूह बनाए जायें, जो दूसरे लोगों को गंगा के बारे में जागरुक कर सकें। महिलाओं के प्रशिक्षित समूह इस काम को बखूबी कर सकते हैं। म्यूजियम में शॉर्ट टर्म प्रदर्शनी लगाई जाएं। फ़्लोटिंग एग्जीबीशन भी लगें। मतलब, गंगा म्यूजियम ऐसा बने, जो हमारे दिलों के बेहद करीब रहे। वर्कशॉप का मकसद यही है कि लाइव म्यूजियम प्रोजेक्ट को कैसे विकसित करना है और उसे तय समय में पूरा कर दिया जाए।
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गंगा म्यूजियम को लेकर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की क्या सोच है, जानिये... 

शकील होसेन - फोटो : Amar Ujala
बोस्टन से आए शकील होसेन का कहना है कि गंगा म्यूजियम ऐसा हो, जिससे समाज का हर वर्ग जुड़ जाए। भारत में अभी तक देखने में आया है कि म्यूजियम जैसी जगहों पर एलीट वर्ग कम आता है, जबकि बाहर से लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और दूसरे विकसित देशों में स्थिति उल्टी है। वहां पर समाज का संभ्रांत वर्ग यानी एलीट क्लास के लोग ही म्यूजियम में जाना ज्यादा पसंद करते हैं। 

गंगा म्यूजियम का प्रोजेक्ट ऐसा हो, जिसमें हर व्यक्ति आए और कुछ सीखकर जाए। यानी उसके मन में गंगा के लिए कुछ करने की उमंग उठे। डेन्यूब म्यूजियम के एक अन्य पदाधिकारी टिम शाली, यू बीस, म्यूजियम ऑफ मॉर्डन जर्मन हिस्ट्री के पदाधिकारी डॉक्टर थोरेसन स्मिट और सेंट स्टीफन किंग म्यूजियम के पदाधिकारी एडले गोर ने भी गंगा म्यूजियम को लेकर अपनी रिपोर्ट पेश की है।

जनवरी-2019 में देश की पहली गंगा फ़्लोटिंग एग्जीबिशन वाराणसी में...
एनएमसीजी के डीजी राजीव रंजन मिश्रा ने बताया कि देश की पहली गंगा फ़्लोटिंग एग्जीबिशन वाराणसी में जनवरी-2019 तक शुरु हो जाएगी। इसके लिए तमाम तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बीएचयू ने इसमें अपना सहयोग दिया है। इसे छोटा म्यूजियम भी कह सकते हैं। गंगा फ़्लोटिंग एग्जीबिशन में दो फ़्लोर होंगे। 50 आदमी ऊपर और 50 आदमी नीचे बैठ सकते हैं। यह प्रदर्शनी एक घाट से दूसरे घाट पर जाएगी।

गंगा से जुड़ाव के लिए फ़्लोटिंग एग्जीबिशन में छोटा सा हाल भी बनाया गया है। इसमें गंगा पर आधारित लघु फ़िल्म दिखाई जाएंगी। हमारा प्रयास है कि प्रयाग से वाराणसी के बीच भी ऐसी ही फ़्लोटिंग एग्जीबिशन शुरू हो। गंगा किनारे वाले अन्य राज्यों में भी कम से कम एक ऐसी ही फ़्लोटिंग एग्जीबिशन आयोजित हो, इस दिशा में भी काम चल रहा है।
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