जर्मनी से आई जीआईजेड की प्रोग्राम हेड मार्टिना बुकार्ड ने कहा, गंगा म्यूजियम दूसरे म्यूजियम की तरह न हो। अर्थात उसमें केवल गंगा से जुड़ा साहित्य या तस्वीरें ही न हों, बल्कि वह लोगों को सिखाने वाला हो, समझाने वाला हो और म्यूजियम से प्रभावित होकर लोग गंगा की स्वच्छता में अपना कुछ योगदान दें, ऐसा प्रोजेक्ट बनना चाहिए। म्यूजियम देखने के बाद हर व्यक्ति गंगा से जुड़ जाये।
अतीत में गंगा का वह रुप दोबारा से कैसे वापस लाया जाए, जो लोग गंगा से कनेक्ट नहीं हैं, वे फिर से इसके पास आएं, देश के पहले म्यूजियम का यही मकसद होगा। सेंट्रल म्यूजियम के अलावा गंगा के किनारे पर स्थित दूसरे शहरों में भी छोटे-छोटे म्यूजियम बनाए जाएं। वहां पर महिलाओं और विद्यार्थियों के समूह बनाए जायें, जो दूसरे लोगों को गंगा के बारे में जागरुक कर सकें। महिलाओं के प्रशिक्षित समूह इस काम को बखूबी कर सकते हैं। म्यूजियम में शॉर्ट टर्म प्रदर्शनी लगाई जाएं। फ़्लोटिंग एग्जीबीशन भी लगें। मतलब, गंगा म्यूजियम ऐसा बने, जो हमारे दिलों के बेहद करीब रहे। वर्कशॉप का मकसद यही है कि लाइव म्यूजियम प्रोजेक्ट को कैसे विकसित करना है और उसे तय समय में पूरा कर दिया जाए।
बोस्टन से आए शकील होसेन का कहना है कि गंगा म्यूजियम ऐसा हो, जिससे समाज का हर वर्ग जुड़ जाए। भारत में अभी तक देखने में आया है कि म्यूजियम जैसी जगहों पर एलीट वर्ग कम आता है, जबकि बाहर से लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और दूसरे विकसित देशों में स्थिति उल्टी है। वहां पर समाज का संभ्रांत वर्ग यानी एलीट क्लास के लोग ही म्यूजियम में जाना ज्यादा पसंद करते हैं।
गंगा म्यूजियम का प्रोजेक्ट ऐसा हो, जिसमें हर व्यक्ति आए और कुछ सीखकर जाए। यानी उसके मन में गंगा के लिए कुछ करने की उमंग उठे। डेन्यूब म्यूजियम के एक अन्य पदाधिकारी टिम शाली, यू बीस, म्यूजियम ऑफ मॉर्डन जर्मन हिस्ट्री के पदाधिकारी डॉक्टर थोरेसन स्मिट और सेंट स्टीफन किंग म्यूजियम के पदाधिकारी एडले गोर ने भी गंगा म्यूजियम को लेकर अपनी रिपोर्ट पेश की है।
जनवरी-2019 में देश की पहली गंगा फ़्लोटिंग एग्जीबिशन वाराणसी में...
एनएमसीजी के डीजी राजीव रंजन मिश्रा ने बताया कि देश की पहली गंगा फ़्लोटिंग एग्जीबिशन वाराणसी में जनवरी-2019 तक शुरु हो जाएगी। इसके लिए तमाम तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बीएचयू ने इसमें अपना सहयोग दिया है। इसे छोटा म्यूजियम भी कह सकते हैं। गंगा फ़्लोटिंग एग्जीबिशन में दो फ़्लोर होंगे। 50 आदमी ऊपर और 50 आदमी नीचे बैठ सकते हैं। यह प्रदर्शनी एक घाट से दूसरे घाट पर जाएगी।
गंगा से जुड़ाव के लिए फ़्लोटिंग एग्जीबिशन में छोटा सा हाल भी बनाया गया है। इसमें गंगा पर आधारित लघु फ़िल्म दिखाई जाएंगी। हमारा प्रयास है कि प्रयाग से वाराणसी के बीच भी ऐसी ही फ़्लोटिंग एग्जीबिशन शुरू हो। गंगा किनारे वाले अन्य राज्यों में भी कम से कम एक ऐसी ही फ़्लोटिंग एग्जीबिशन आयोजित हो, इस दिशा में भी काम चल रहा है।