पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ओमान तट के पास एक भारतीय चालक दल वाले रासायनिक टैंकर 'एमटी सिरोन' पर गोलीबारी की। इस मामले पर सरकार ने बताया सभी नाविक सुरक्षित हैं। साथ ही, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में खाद और रसोई गैस का भरपूर भंडार भी मौजूद है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि सराकर ने मामले पर क्या-क्या जानकारी दी।
पश्चिम एशिया में समुद्र के रास्ते व्यापार करना लगातार खतरनाक होता जा रहा है। भारत सरकार ने बताया ईरान ने भारतीय चालक दल वाले एक रासायनिक टैंकर को अपना निशाना बनाया। ओमान की समुद्री सीमा के पास हुई इस फायरिंग की घटना ने सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। हालांकि, भारत सरकार पूरे हालात पर करीब से नजर बनाए हुए है और देशवासियों को खाद और रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर भी बड़ा भरोसा दिया है।
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पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने सोमवार को इस घटना की पूरी जानकारी दी। ईरानी तटरक्षक बल ने 25 अप्रैल को ओमान के आउटर पोर्ट सीमा में एक टोगो-ध्वज वाले टैंकर 'एमटी सिरोन' पर गोलियां चलाईं। इस टैंकर पर कई भारतीय नाविक सवार थे। मंत्रालय के अधिकारी मनदीप सिंह रंधावा ने बताया कि यह गोलीबारी सिर्फ चेतावनी के तौर पर की गई थी। राहत की बात यह है कि जहाज पर सवार सभी 17 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। यह घटना उस समय हुई जब यह जहाज अन्य जहाजों के साथ वहां से गुजर रहा था। डीजी शिपिंग नियंत्रण कक्ष अब तक 7,780 कॉल का जवाब दे चुका है और फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है।
22 अप्रैल को ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज पर हमला किया था, जो गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह आ रहा था। यह हमला तब हुआ जब ट्रंप मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति हैं, उनके द्वारा अनिश्चितकालीन युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही घंटे बीते थे। ईरान के आईआरजीसी-एन (IRGC-N) ने एमएससी-फ्रांसेस्का और एपामिनोडास नामक दो जहाजों पर हमला कर उन्हें कब्जे में लिया था।
18 अप्रैल को भी ईरान ने इसी रास्ते में दो भारतीय जहाजों पर हमला किया था, जिस पर भारत ने कड़ा विरोध जताया था। ईरान का दावा था कि ये जहाज बिना अनुमति के काम कर रहे थे, जबकि भारत ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का खुला उल्लंघन बताया था।
क्या देश में किसानों के लिए खाद की कमी?
सरकार ने साफ किया है कि देश में फर्टिलाइजर (खाद) का भंडार बहुत मजबूत है और डरने की जरूरत नहीं है।
खरीफ की फसल के लिए 18.17 लाख मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत थी, लेकिन हमारे पास 71.58 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक मौजूद है।
डीएपी खाद भी जरूरत से कई गुना ज्यादा गोदामों में भरी हुई है।
सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि यूरिया (266.5 रुपये) और डीएपी (1350 रुपये) के दामों में सरकार ने कोई बढ़ोतरी नहीं की है।
सरकार ने एलपीजी पर क्या अपडेट दिया?
पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी गैस की सप्लाई 100 प्रतिशत सुरक्षित है।
कमर्शियल गैस का कोटा 70 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है, इसलिए लोगों को पैनिक बाइंग (डर से खरीदारी) करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
गैस की कालाबाजारी को रोकने के लिए अब 93 प्रतिशत सिलेंडर एक खास कोड (ऑथेंटिकेशन) के जरिए ही बांटे जा रहे हैं।
नियमों को तोड़ने और अफवाह फैलाने वाली 71 गैस एजेंसियों (डिस्ट्रीब्यूटर्स) को सरकार ने तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को कैसे निकाला जा रहा?
शिपिंग और विदेश मंत्रालय मिलकर बाहर फंसे भारतीयों को लगातार वापस ला रहे हैं और 24 घंटे एक कंट्रोल रूम काम कर रहा है। अब तक 2,770 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित देश वापस लाया जा चुका है। भारत सरकार कूटनीति पर भी जोर दे रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर यूएई का दौरा कर चुके हैं। इस्राइल का हवाई रास्ता खुला है और उड़ानें चल रही हैं, लेकिन ईरान के लिए अभी जमीनी रास्ते से 2,461 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है।
ब्रिक्स बैठक में फलस्तीन और यरूशलम पर क्या बात हुई?
पश्चिम एशिया के मौजूदा युद्ध को लेकर ब्रिक्स (BRICS) देशों के बीच विचारों में काफी मतभेद देखा गया है। इसी वजह से हाल ही में दिल्ली में हुई ब्रिक्स अधिकारियों की बैठक में फलस्तीन के मुद्दे पर कोई संयुक्त बयान नहीं आ सका। यरूशलम को फलस्तीन की राजधानी के रूप में लिखने को लेकर भी कई देशों के अलग-अलग रुख सामने आए हैं। हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया है कि वह हमेशा शांति का पक्षधर है और कूटनीतिक मोर्चे पर शांति स्थापना की लगातार कोशिशें कर रहा है।