कर्नाटक के सियासी संकट को लेकर दो राज्यों के गुप्तचर विभाग आपस में उलझ पड़े हैं। मसला, कर्नाटक के विधायकों से जुड़ी सूचनाओं के आदान प्रदान का है। इस बाबत महाराष्ट्र पुलिस का गुप्तचर विभाग और कर्नाटक पुलिस की इंटेलीजेंस विंग आमने सामने आ गए हैं।
अधिकारी का कहना है कि कर्नाटक में जब से जेडीएस-कांग्रेस की सरकार बनी है, यहां की इंटेलीजेंस विंग लगातार भागदौड़ की मुद्रा में है। कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों के घरों से लेकर उनके रिश्तेदारों पर नजर रखने के मौखिक आदेश आते रहे हैं। इस सियासी प्रकरण में सूचनाएं जुटाने के लिए करीब डेढ़ सौ गुप्तचर लगाए गए हैं।
नियमित सूचनाएं टाइप कर ई-मेल पर भेजी जाती हैं। कई बार अफसरों के वाट्सएप पर सूचनाएं डाल देते हैं, मगर इस सियासी संग्राम में गुप्तचरों को सीधे एसएसपी से बात करने का अधिकार दिया गया है। एसएसपी द्वारा विधायकों से जुड़ी सूचना आईजी इंटेलीजेंस तक पहुंचाई जाती है। वहां से वह सूचना सीधे सीएम के पास पहुंचती है।
कर्नाटक के बागी विधायक जब से मुंबई के होटल में पहुंचे हैं, तभी से दोनों राज्यों के गुप्तचर विभाग के बीच तनातनी शुरू हो गई। चूंकि दोनों राज्यों में अलग-अलग पार्टी की सरकार है, इसलिए राजनीतिक सूचनाओं का आवागमन उतनी तेजी से नहीं हो सका।
सामान्य तौर पर हर राज्य की पुलिस आपस में कानून व्यवस्था, आतंकी अलर्ट और बड़े गिरोह आदि की सूचनाएं आपस में त्वरित गति से साझा करती है। विधायकों का प्रकरण शुरु होने के बाद दोनों राज्यों के गुप्तचर विभाग आपस में दूसरी सूचनाएं तो साझा कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक जानकारी देने से बच रहे हैं।
कर्नाटक पुलिस की इंटेलीजेंस इकाई ने मुंबई के होटल में ठहरे विधायकों से जुड़ी सूचना लेने के लिए जब महाराष्ट्र पुलिस के गुप्तचर विभाग से संपर्क साधा तो उन्हें 'न' में जवाब मिला।
बता दें कि कांग्रेस नेता डी शिवकुमार और उनसे पहले कर्नाटक के सीएम एचडी कुमारस्वामी भी मुंबई जाकर विधायकों से बात करना चाहते थे। कर्नाटक पुलिस की इंटेलीजेंस विंग ने मुंबई के गुप्तचर विभाग से जब इस बाबत कुछ सूचनाएं देने का आग्रह किया तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया।