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कर्नाटक के सियासी संकट को लेकर उलझ पड़े दो राज्यों के गुप्तचर विभाग

Thu, 11 Jul 2019 06:24 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
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कर्नाटक पुलिस (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : पीटीआई
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कर्नाटक के सियासी संकट को लेकर दो राज्यों के गुप्तचर विभाग आपस में उलझ पड़े हैं। मसला, कर्नाटक के विधायकों से जुड़ी सूचनाओं के आदान प्रदान का है। इस बाबत महाराष्ट्र पुलिस का गुप्तचर विभाग और कर्नाटक पुलिस की इंटेलीजेंस विंग आमने सामने आ गए हैं। 

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यहां तक कि कर्नाटक पुलिस के आईजी स्तर के एक अधिकारी ने जब महाराष्ट्र गुप्तचर विभाग में अपने समकक्ष अफसर से मुंबई के होटल में ठहरे कर्नाटक के विधायकों से जुड़ी कोई सूचना लेनी चाही तो उन्हें जवाब मिला, आप जानते हैं कि आपका फोन टेपिंग प्रक्रिया में हो सकता है। 

यह घटना बुधवार की है जब कांग्रेस नेता डी शिवकुमार को मुंबई के रेनेसां होटल के बाहर ही रोक दिया गया था। कर्नाटक पुलिस की इंटेलीजेंस विंग के एक आला अधिकारी ने यह बात स्वीकार की है। उनके मुताबिक, जब से कर्नाटक के बागी विधायक मुंबई के होटल में पहुंचे हैं, दोनों राज्यों की इंटेलीजेंस इकाई परेशान है। 
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उनका कहना है कि इस चक्कर में कई जरूरी सूचनाएं भी छूट रही हैं। ऐसा नहीं है कि इस सियासी संकट में केवल कर्नाटक पुलिस की इंटेलीजेंस विंग को ही दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। महाराष्ट्र में भी ऐसा ही है। वहां भी गुप्तचर विभाग पर कर्नाटक के विधायकों को लेकर भारी दबाव है। 

विधायकों से जुड़ी पल-पल की जानकारी मांगी जा रही है। ये विधायक मोबाइल पर कब और किससे बात करेंगे, यह सब गुप्तचर विभाग ही तय करता है। गुप्तचर विभाग द्वारा ऊपर से आदेश मिलने के बाद विधायकों को मोबाइल फोन उपलब्ध कराया जाता है।
 

डेढ़ सौ गुप्तचर जुटाते हैं पल पल की जानकारी

अधिकारी का कहना है कि कर्नाटक में जब से जेडीएस-कांग्रेस की सरकार बनी है, यहां की इंटेलीजेंस विंग लगातार भागदौड़ की मुद्रा में है। कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों के घरों से लेकर उनके रिश्तेदारों पर नजर रखने के मौखिक आदेश आते रहे हैं। इस सियासी प्रकरण में सूचनाएं जुटाने के लिए करीब डेढ़ सौ गुप्तचर लगाए गए हैं। 

नियमित सूचनाएं टाइप कर ई-मेल पर भेजी जाती हैं। कई बार अफसरों के वाट्सएप पर सूचनाएं डाल देते हैं, मगर इस सियासी संग्राम में गुप्तचरों को सीधे एसएसपी से बात करने का अधिकार दिया गया है। एसएसपी द्वारा विधायकों से जुड़ी सूचना आईजी इंटेलीजेंस तक पहुंचाई जाती है। वहां से वह सूचना सीधे सीएम के पास पहुंचती है।

पुलिस का आपसी भाईचारा और ड्यूटी की दुहाई भी काम न आई

कर्नाटक के बागी विधायक जब से मुंबई के होटल में पहुंचे हैं, तभी से दोनों राज्यों के गुप्तचर विभाग के बीच तनातनी शुरू हो गई। चूंकि दोनों राज्यों में अलग-अलग पार्टी की सरकार है, इसलिए राजनीतिक सूचनाओं का आवागमन उतनी तेजी से नहीं हो सका।

सामान्य तौर पर हर राज्य की पुलिस आपस में कानून व्यवस्था, आतंकी अलर्ट और बड़े गिरोह आदि की सूचनाएं आपस में त्वरित गति से साझा करती है। विधायकों का प्रकरण शुरु होने के बाद दोनों राज्यों के गुप्तचर विभाग आपस में दूसरी सूचनाएं तो साझा कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक जानकारी देने से बच रहे हैं।

कर्नाटक पुलिस की इंटेलीजेंस इकाई ने मुंबई के होटल में ठहरे विधायकों से जुड़ी सूचना लेने के लिए जब महाराष्ट्र पुलिस के गुप्तचर विभाग से संपर्क साधा तो उन्हें 'न' में जवाब मिला। 

बता दें कि कांग्रेस नेता डी शिवकुमार और उनसे पहले कर्नाटक के सीएम एचडी कुमारस्वामी भी मुंबई जाकर विधायकों से बात करना चाहते थे। कर्नाटक पुलिस की इंटेलीजेंस विंग ने मुंबई के गुप्तचर विभाग से जब इस बाबत कुछ सूचनाएं देने का आग्रह किया तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया।

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