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SC: आग के कारण से नहीं रोका जा सकता बीमा दावा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा-अग्नि बीमा जोखिम प्रबंधन का अहम साधन

Thu, 30 Oct 2025 09:54 PM IST
लव गौर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि जब तक बीमाधारक खुद आग लगाने में शामिल नहीं है, तब तक आग लगने का कारण दावा अस्वीकार करने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि फायर इंश्योरेंस केवल आग से होने वाले नुकसान की भरपाई का साधन नहीं, बल्कि यह जोखिम प्रबंधन, संपत्ति सुरक्षा और आर्थिक मजबूती का एक रणनीतिक उपकरण  है।
 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अग्नि बीमा पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि फायर इंश्योरेंस केवल आग से होने वाले नुकसान की भरपाई का साधन नहीं, बल्कि यह जोखिम प्रबंधन, संपत्ति सुरक्षा और आर्थिक मजबूती का एक रणनीतिक उपकरण है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक बीमाधारक खुद आग लगाने में शामिल नहीं है, तब तक आग लगने का कारण दावा अस्वीकार करने का आधार नहीं हो सकता और ऐसी घटनाएं बीमा पॉलिसियों के अंतर्गत आती हैं।
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कोर्ट ने कंपनी के दावे को बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ओरियन कॉनमर्क्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मामले में आई है। अदालत ने कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि सितंबर 2010 में कंपनी के परिसर में लगी आग दुर्घटनावश थी और वह बीमा पॉलिसी के दायरे में आती है। न्यायालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ कंपनी ओरियन कॉनमर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के दावे को बरकरार रखा।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कहा, "इस न्यायालय का मत है कि एक बार यह साबित हो जाने पर कि नुकसान आग के कारण हुआ है और धोखाधड़ी का कोई आरोप/निर्णय नहीं है या बीमाधारक आग लगाने वाला नहीं है तो यह मान लिया जाएगा कि आग दुर्घटनावश लगी थी और वह अग्नि बीमा पॉलिसी के दायरे में आती है।”
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फैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा, "न्यायालय का मानना है कि अग्नि बीमा जोखिम प्रबंधन, संपत्ति संरक्षण और आर्थिक लचीलेपन के लिए एक रणनीतिक उपकरण है। अग्नि बीमा पॉलिसी आग लगने से नहीं रोकती, बल्कि आग लगने पर उसके वित्तीय प्रभाव को कम करती है। अग्नि बीमा की अवधारणा के महत्व को ध्यान में रखते हुए इसके संचालन के सिद्धांतों को रेखांकित करना महत्वपूर्ण है।"

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आग आकस्मिक है, तो उसका कारण जानने की जरूरत नहीं-SC
फैसले में कहा गया कि यह स्थापित कानून है कि अग्नि बीमा का अनुबंध बीमित व्यक्ति को आग से होने वाले नुकसान की भरपाई करने का एक अनुबंध है। अदालत ने साफ कहा कि अगर आग जानबूझकर लगाई गई है, तो वह बीमा कवरेज के दायरे में नहीं आती। लेकिन यदि आग आकस्मिक है, तो उसका कारण जानने की जरूरत नहीं।
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इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज करते हुए ओरियन कॉनमर्क्स की क्रॉस अपील स्वीकार कर ली और कंपनी को ब्याज सहित मुआवजा देने का आदेश दिया। बता दें कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब 25 सितंबर 2010 को ओरियन के परिसर में आग लगी और बीमा कंपनी ने दावे को “कारण संदिग्ध” बताते हुए खारिज कर दिया। बाद में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने 2020 में कंपनी के पक्ष में आंशिक राहत देते हुए बीमा कंपनी को ₹61.39 लाख का भुगतान करने का निर्देश दिया था। दोनों पक्षों ने इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
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