राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को खराब टायरों की निस्तारण पद्धति पर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने ये निर्देश इस्तेमाल हुए टायरों से ईंधन तेल बनाने वाले अवैध पायरोलिसिस उद्योगों पर प्रतिबंध लगाने वाली याचिका पर दिए।
एनजीटी चेयरमैन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली बेंच ने सीपीसीबी को रिपोर्ट पेश करने के लिए तीन माह का समय दिया है। साथ ही बेंच ने याचिकाकर्ता एनजीओ सोशल एक्शन फॉर फॉरेस्ट (सेफ) को शीर्ष प्रदूषण बोर्ड के समक्ष कागजात प्रस्तुत करने और एक हफ्ते के भीतर हलफनामा दायर करने के भी निर्देश दिए हैं।
‘सेफ’ ने याचिका में कहा था पायरोलिसिस उद्योगों में नियमों की अनदेखी कर घिसे हुए टायरों (एंड ऑफ लाइफ टायर्स) से कमतर गुणवत्ता वाले पायरोलिसिस तेल, पायरो गैस, चार, कार्बन ब्लैक का उत्पादन हो रहा है। इस उत्पादन प्रक्रिया में कैंसरकारी और श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक प्रदूषक निकल रहे हैं, जो पर्यावरण पर दुष्प्रभाव डाल रहे हैं।
इसलिए इन उद्योगों में खराब टायरों के उपयोग पर प्रतिबंध लगना चाहिए। साथ ही याचिका में एनजीटी से पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को खराब टायरों के आयात पर भी उचित निगरानी और वैज्ञानिक परीक्षण की व्यवस्था भी स्थापित करने के निर्देश देने की मांग की गई।