: चेन्नई के शोर-शराबे से दूर महाबलीपुरम के पास पुंजेरी इलाका बुधवार शाम अचानक नारों से गूंज उठा। मौका था तमिलगा वेत्री कड़गम की ओर से आयोजित इफ्तार दावत का। अभिनेता से नेता बने विजय की नई राजनीतिक पारी में यह दूसरा बड़ा शक्ति प्रदर्शन था। प्रशासन की ओर से भीड़ को कंट्रोल करने की तो कोशिशें बहुत हुईं, लेकिन सुपरस्टार की एक झलक पाने की दीवानगी के आगे सब धरी की धरी रह गईं। एक बार फिर से विजय के कार्यक्रम में भगदड़ जैसी स्तिथि बन गई.
पहले की घटना से ली सीख
चेन्नई के रॉयपेट्टाह में आयोजित पहली इफ्तार पार्टी में जो अफरातफरी मची थी, उसने पुलिस और आयोजकों की रातों की नींद उड़ा दी थी। शायद इसीलिए इस बार विजय की टीम ने शहर से दूर एक गुमनाम कस्बे को चुना। टीवीके नेता आधव अर्जुना खुद कमान संभाले हुए थे। वह बार-बार माइक से कैडरों को 'तमीज' सिखा रहे थे और कह रहे थे, "अपनी सीटों से न उठें, मौके की गरिमा समझें, फोन जेब के अंदर रखें और रील बनाने के चक्कर में न पड़ें।" शुरुआत में सब कुछ ठीक रहा। जब तक विजय दुआ में मशगूल थे, भीड़ भी शांत थी। लेकिन जैसे ही विजय ने वहां से निकलने के लिए कदम बढ़ाए, अनुशासन का बांध टूट गया।
महिलाओं के बाड़े में 'मैनेजमेंट' फेल
बता दें कि महिलाओं और बच्चों के लिए अलग व्यवस्था की गई थी। विल्लुपुरम से आईं सायरा ने पिछले साल का मंजर याद करते हुए बताया, "पिछली बार तो थलापति को देखने के चक्कर में औरतों ने बैरिकेड्स ही तोड़ दिए थे।" इस बार आयोजकों ने एक दांव खेला। महिलाओं से वादा किया गया कि अगर वे शांति बनाए रखेंगी, तो विजय खुद उनके बीच आएंगे।
लेकिन जैसे ही महिलाओं को अहसास हुआ कि विजय उनके बाड़े में नहीं आने वाले, वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। जब उन्हें लगा कि वे मुख्य हॉल तक नहीं पहुंच पाएंगी, तो उन महिलाओं ने अपने वे फोन निकाल लिए जिन्हें अब तक छिपा कर रखा गया था। उन्होंने सीधे वहां लगी बड़ी स्क्रीन की ओर दौड़ लगा दी और स्क्रीन को जूम करके वीडियो बनाने लगीं।
बस्सी आनंद का आखिरी दांव
भीड़ इतनी अनियंत्रित हो गई कि प्रवेश द्वार पर दबाव बढ़ने लगा। हालत बेकाबू होने के बाद बस्सी आनंद को आनन-फानन में घोषणा करना पड़ा कि यह कार्यक्रम केवल मुस्लिम समुदाय के लिए सीमित है।
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स्टारडम के आगे फीकी पड़ी राजनीति
सबसे दिलचस्प तस्वीर पार्टी की प्रदेश संयुक्त सचिव और पेशे से वकील यास्मीन नैना मोहम्मद के रूप में दिखी। यास्मीन ने शुरुआत में महिलाओं पर सख्त अनुशासन लागू किया था, उन्हें सीट से हिलने तक की इजाजत नहीं थी। वह बड़े गर्व से सुना रही थीं कि वह 'थलापति' से 10 से ज्यादा बार मिल चुकी हैं, उनके हाव-भाव ऐसे थे जैसे उनके लिए विजय का आना कोई बड़ी बात नहीं।
लेकिन जैसे ही विजय ने एंट्री ली, यास्मीन का सारा अनुशासन हवा हो गया। वह खुद बाड़े के किनारे तक जा पहुंचीं और गर्दन उचकाकर विजय को देखने लगीं। कुछ देर पहले जिस महिला को उन्होंने डांटकर बिठाया था, वह भी उनके बगल में आ खड़ी हुई और दोनों किसी सहेली की तरह विजय को देख-देखकर मुस्कुराती रहीं।
TVK की यह दूसरी इफ्तार पार्टी इस बात का सबूत है कि विजय की पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं, बल्कि उनके अपने प्रशंसकों का बेकाबू प्यार है। एक राजनीतिक दल के रूप में उभरने की कोशिश कर रही TVK को अभी स्टारडम और जमीनी राजनीति के बीच संतुलन बिठाने के लिए लंबा सफर तय करना है।