आम आदमी पार्टी के राजस्थान प्रभारी कुमार विश्वास और दिल्ली के पूर्व प्रभारी दिलीप पांडे के बीच शुरु हुई नई तकरार के पीछे की कहानी बहुत ही सनसनीखेज है।
27 जनवरी 2018, ये वो तारीख है जिस पर लाखों निगाहें हैं। आप कहेंगे लोगों की निगाहें तो 26 जनवरी पर होती हैं तो फिर भला अगले साल की 27 जनवरी में क्या खास है? तो जनाब ये तारीख ही आम आदमी पार्टी में मचे महासंग्राम की असली वजह है।
27 जनवरी 2018 को राज्य सभा के तीन सदस्य जनार्दन द्विवेदी, परवेज हाशमी और डॉ. कर्ण सिंह रिटायर हो रहे हैं। ये तीनों कांग्रेस के नेता है और दिल्ली विधानसभा में मौजूदा विधायकों की संख्या के मुताबिक इन तीनों सीटों के लिए होने वाले नए चुनाव में तीनों सदस्य आम आदमी पार्टी के ही चुने जाएंगे। बस, आम आदमी पार्टी में सारी रार इन्हीं तीन सीटों को लेकर चल रही है।
रार इस बात को लेकर है कि आम आदमी पार्टी की नुमाइंदगी संसद के उच्च सदन में कौन करेगा? इसी चक्कर में हर कोई पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल को सेट करने में लगा है। पार्टी में बवाल इस बात को लेकर है कि वो तीन नेता कौन होंगे जो अगले छह साल सांसद बनकर पूरे देश में घूम सकेंगे और पार्टी के बोए पौधों के फल या फूल जो भी कहें चुन सकेंगे।
पार्टी में दिल्ली विधानसभा चुनाव के प्रचार के दिनों तक ये आम सहमति रही कि वरीयता के हिसाब से इन तीन सीटों के लिए कुमार विश्वास, संजय सिंह और आशुतोष का दावा बनता है। चुनाव तक सब ठीक भी रहा। फिर दिल्ली की सरकार बनी। और, रायता फैलना शुरू हो गया।
सूत्र बताते हैं कि अरविंद केजरीवाल के करीबी नहीं चाहते हैं कि बिना उनकी रजामंदी के इन तीनों सीटों के बारे में कोई सोचे भी। जो नेता भी इन सीटों की बात छेड़ता भी है, उसके खिलाफ एक मुहिम सी शुरू हो जाती है। राजस्थान का प्रभारी बनने के बाद कुमार विश्वास और दिल्ली के पूर्व प्रभारी दिलीप पांडे के बीच जो कुछ हो रहा है, वह तो एक बानगी है। पार्टी के कोषाध्यक्ष पद से हटाए गए आशीष खेतान ने भी बीच में राज्य सभा सदस्य बनने का सपना पाल लिया था और वह भी खेत रहे। संजय सिंह के प्रभारी रहते पार्टी पंजाब चुनाव में नंबर दो पर रही तो उनका दावा जरूर कमजोर नहीं हुआ है। उन्हें अब यूपी के स्थानीय निकाय चुनावों की जिम्मेदारी सौंपी है, इन चुनावों में अगर वो पार्टी को सम्मानजनक सीटें भी दिला पाए तो उनका राज्यसभा सदस्य बनना तय है।
संजय सिंह के अलावा बाकी दो सीटों पर पार्टी के किस नेता के नाम पर केजरीवाल की मुहर लगेगी। इसे लेकर गोटियां खेली जा रही हैं, रोटियां सेंकी जा रही हैं। कुमार विश्वास की लड़ाई लड़ने के चक्कर में खुद कपिल मिश्रा सियासी दंगल में चित हो चुके हैं। इन बाकी दो सीटों में से एक पर कुमार विश्वास की दावेदारी है, इसी दावेदारी को खारिज करने के लिए बार बार उन्हें बीजेपी का यार और पार्टी का गद्दार बनाने की सुनियोजित कोशिश चल रही है, दूसरी कोशिश सीबीआई के सहारे अरविंद केजरीवाल की छवि खराब करने की है।
पार्टी के सूत्र बताते हैं कि सीबीआई को पार्टी के ही एक बड़े नेता ने ऐसी जानकारियां मुहैया कराई हैं, जिन्हें सबूत में बदला जा सका तो दिल्ली सरकार के कम से कम दो मंत्रियों पर सीबीआई की गाज ऐन राज्य सभा चुनाव से पहले गिर सकती है।‘आप’ में मची कलह की ये है असली कहानी!