आईएनएस तरंगिनी इस साल छह अप्रैल को कोच्चि से लोकयान 2022 के लिए 14 देशों की यात्रा के लिए रवाना हुआ। सात महीने की लंबी यात्रा के दौरान, जहाज 17 बंदरगाहों पर 17485 समुद्री मील की दूरी तय करेगा।
भारतीय नौसेना का पहला सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस तरंगिनी लोकयान 2022 में भाग लेने बुधवार को मिस्र के पोर्ट सईद पर पहुंचा। यहां मिस्र की नौसेना और भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने जहाज का स्वागत किया। लोकयान 2022 के दौरान जहाज विभिन्न आधिकारिक कार्यक्रमों में भाग लेगा।
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छह अप्रैल को कोच्चि से रवाना हुआ है आईएनएस तरंगिनी
आईएनएस तरंगिनी इस साल छह अप्रैल को कोच्चि में दक्षिणी नौसेना कमान के नौसेना घाट से लोकयान 2022 के लिए 14 देशों की यात्रा के लिए रवाना हुआ। अपनी सात महीने की लंबी यात्रा के दौरान, जहाज 17 बंदरगाहों पर 17,485 समुद्री मील की दूरी तय करेगा। इस यात्रा को दक्षिणी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रियर एडमिरल एंटनी जॉर्ज ने झंडी दिखाकर रवाना किया।
आजादी का अमृत महोत्सव पर 75 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आईएनएस तरंगिनी पर सवार भारतीय नौसेना के जवानों ने यूरोप में समुद्र में राष्ट्रीय ध्वज फहराया, जिससे तरंगिनी की यात्रा का एक बेहद आकर्षण बन गया।
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दुनिया की परिक्रमा कर चुका है आईएनएस तरंगिनी
आईएनएस तरंगिनी एक तीन मस्तूल वाला बार्क है, जिसे 1997 में भारतीय नौसेना के लिए एक प्रशिक्षण जहाज के रूप में कमीशन किया गया था। जहाज का निर्माण गोवा में ब्रिटिश नौसैनिक वास्तुकार कॉलिन मुडी द्वारा डिजाइन के अनुसार किया गया था और इसे एक दिसंबर 1995 को लॉन्च किया गया था। आईएनएस तरंगिनी 2003-04 में दुनिया की परिक्रमा करने वाली पहली भारतीय नौसैनिक जहाज बना।
मिस्र और भारत के बीच रक्षा संबंध अच्छे
आईएनएस तरंगिनी के लिए 2022 बहुत विशेष है, क्योंकि इस साल भारत के साथ मिस्र अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। मिस्र और भारत के बीच भी मैत्रीपूर्ण रक्षा संबंध हैं। 1960 के दशक में संयुक्त रूप से एक लड़ाकू विमान विकसित करने के प्रयासों को लेकर वायु सेना का बड़ा सहयोग रहा था। भारतीय वायुसेना पायलटों ने 1960 से 1984 तक मिस्र के पायलटों को भी प्रशिक्षित किया था।