केंद्र सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ी पहल की है। सरकार ने पूरे देश में दूषित स्थलों की पहचान करने और उनकी सफाई के लिए नए नियम बनाए हैं।
केंद्र की ओर से जारी पर्यावरण संरक्षण (दूषित स्थलों का प्रबंधन) नियम, 2025 के तहत अब मिट्टी, तलछट और पानी में खतरनाक और विषाक्त पदार्थों के संपर्क को रोकने के लिए काम किया जाएगा। नए नियम लागू करने की वजह दूषित स्थलों की पहचान करने, प्रदूषण फैलाने वालों को जवाबदेह बनाना और जोखिम-आधारित उपचार के माध्यम से सफाई के लिए सिस्टम बनाना है।
नए नियमों के तहत राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) और स्थानीय प्राधिकारियों को औद्योगिक गतिविधियों, ऐतिहासिक अपशिष्ट डंपों या सामुदायिक शिकायतों के आधार पर संदिग्ध दूषित स्थलों की पहचान करने और उन्हें सूचीबद्ध करने का अधिकार होगा। ऐसे स्थानों की मैपिंग की जाएगी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) अपने ऑनलाइन पोर्टल से उन पर नजर रखेगा। सरकार ने कहा कि जब ऐसे स्थानों पर प्रदूषण अधिक मिलेगा तो उस स्थल को आधिकारिक तौर पर दूषित स्थल घोषित कर दिया जाएगा। साथ ही अनिवार्य रूप से सुधार किया जाएगा।
नए नियमों में जिम्मेदार व्यक्ति को लेकर भी बात की गई है। इसके तहत ऐसा व्यक्ति, कंपनी या संस्था जो प्रदूषण फैलाने के लिए जिम्मेदार होगी उसको चिह्नित किया जाएगा। संबंधित राज्य बोर्ड को साइट के दूषित होने की सूचना प्रकाशित होने की तिथि से 90 दिनों के भीतर प्रदूषण के लिए जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान करनी होगी।
यदि ऐसे व्यक्ति पहचान नहीं की जा सकती है, तो सरकार विभिन्न संसाधनों का उपयोग करके सुधार के लिए धन मुहैया कराएगी। वहीं जिम्मेदार व्यक्ति पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को होने वाली सभी प्रकार की क्षति के लिए उत्तरदायी होंगे। उन्हें बिना अनुमोदन के सफाई के दौरान और उसके बाद भूमि स्वामित्व या भूमि उपयोग को हस्तांतरित करने से प्रतिबंधित किया गया है।
बनाई जाएगी कमेटी
नए नियमों के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए एक तकनीकी समिति बनाई जाएगी। यह समिति अतिरिक्त सुधारात्मक कार्रवाई की सिफारिश करेगी। इस समिति में केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य बोर्डों, डोमेन विशेषज्ञों और उद्योग नियामकों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति इन नियमों के प्रावधानों के कार्यान्वयन की निगरानी करेगी और केंद्र सरकार को वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
सार्वजनिक भागीदारी पर जोर
नए नियमों में सार्वजनिक भागीदारी पर जोर दिया गया है। राज्य बोर्ड साइट के प्रकाशन के 60 दिनों के भीतर प्रभावित हितधारकों से टिप्पणियां और सुझाव आमंत्रित करेगा। समुदायों को सूचित करने के लिए स्थानीय समाचार पत्रों में अंतिम सूची प्रकाशित करेगा। सुधार कार्यों के लिए धन जुटाने हेतु नियम बनाए गए हैं। इसमें हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच 90:10 के अनुपात में और अन्य राज्यों के लिए 60:40 के अनुपात में लागत साझा करने की अनुमति देते हैं। केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्र पूरी लागत वहन करेगा।