स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में ये बात सामने आई है कि 2014 के लोकसभा के चुनावों में सोशल मीडिया की भूमिका काफी अहम रही। चुनावों के पहले ट्विटर का इस्तेमाल भी दशकों से सत्ता में काबिज कांग्रेस को हराने का एक कारण बना।
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुतबिक भाजपा का अगुवाई वाली एनडीए अपने समर्थकों द्वारा पोस्ट ट्वीट और रीट्वीट करने के मामले में अपनी विरोधी पार्टियों से काफी आगे थीं। अगर तुलना की जाए तो कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए की अपेक्षा एनडीए के समर्थकों की संख्या भी काफी ज्यादा थी।
भाजपा गठबंधन के लिए नकारात्मक ट्वीट्स भी उनके प्रतिद्वंद्वियों से कहीं ज्यादा कम थीं। तीन साल पहले 7 अप्रैल से 12 मई के अंतराज में ये खाई और भी ज्यादा चौड़ी हो गई।
ये निष्कर्ष काफी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि तीन साल बाद भारी जीत के साथ सत्ता में आने और कई महत्वपूर्ण राज्य और नागरिक चुनाव जीतने के बाद भी भाजपा भारत में सोशल मीडिया पर काफी हावी हो रही है।
स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी 1.55 करोड़ ट्विटर अकाउंटों और 1.06 करोड़ पोस्टों के अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। इस अध्ययन के अनुसार बाकी पार्टियों के हार की वजह लोगों से संवाद स्थापित न करना बनता जा रहा है।
सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले कांग्रेसी नेता शशि थरूर का कहना है कि बीजेपी के ट्विटर इस्तेमाल करने वाले लोगों के संगठित गिरोह सोशल मीडिया पर हावी हैं। थरूर ने यह बात हिंदुस्तान टाइम्स से ट्विटर ने 2014 लोकसभा चुनाव में मतदाताओं को कैसे प्रभावित किया विषय पर बातचीत के दौरान कही।
दरअसल, थरुर से सवाल पूछा गया कि अगर 2014 के चुनावों में नकारात्मक भावनाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, तो क्या यह माना जा सकता है कि ट्विटर विपक्ष के हाथों में एक प्रभावी टूल है?
इस पर थरूर ने कहा कि मैं इस निष्कर्ष पर नहीं जा सकता क्योंकि भाजपा सत्ता में होने के बावजूद विपक्ष की तरह व्यवहार करती है! उनके ट्वीटर्स, रीट्विटर्स और ट्रोल के संगठित गिरोह सोशल मीडिया पर हावी हैं। ये लोग बहुत प्रभावी ढंग से उन लोगों के खिलाफ कैम्पेन चलाते हैं जिनसे वे असहमत होते हैं।