खाद्य तेल के दाम अब आसमान छूने लगे है। इसका असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर दिखाई देने लगा है। आज खाद्य तेलों के दाम कोविड पूर्व स्तर से भी 50 से 70 फीसदी तक बढ़ गए हैं। सूरजमुखी का जो तेल फरवरी 2019 में 98 रुपए प्रति लीटर मिल रहा था। अब वह 180 से 250 रुपए प्रति लीटर हो चुका है। इधर, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर भी कह चुके है कि रूस और यूक्रेन के संकट के चलते खाद्य तेल की कीमत अगले कुछ समय तक महंगी बनी रहेगी।
लोकल सर्किल के सर्वे के अनुसार, देश में खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों ने कई लोगों को इसकी खपत कम करने व कई अन्य को खाद्य तेल की गुणवत्ता से समझौता करने पर मजबूर कर दिया है। इस सर्वे में 359 जिलों से 360000 प्रतिक्रियाएं ली गई हैं। इसमें यह भी पाया गया है कि 67 फीसदी घरों में खाद्य तेल के लिए अधिक भुगतान किए जाने के कारण उनकी बचत कम होती जा रही है।
यह सर्वे ऐसे समय में हुआ है जब खाद्य तेलों के दामों में पिछले 12 महीनों में 50-100 फीसदी और बीते 45 दिनों में 25-40 फीसदी का उछाल आया है। इस सर्वे में 29 फीसदी परिवारों ने कहा है कि उन्होंने खाद्य तेल की गुणवत्ता को घटा दिया है। उनका कहना है कि वह निचले दर्जे का तेल इस्तेमाल कर रहे हैं। 67 फीसदी परिवारों का कहना है कि उन्होंने अपने पसंदीदा खाद्य तेल को नहीं बदला है।
इस सर्वे में यह भी अध्ययन किया गया कि भारतीय घरों में किस तरह का खाद्य तेल इस्तेमाल होता है। 25 फीसदी परिवारों ने कहा कि वह सूरजमुखी का तेल इस्तेमाल करते हैं। जबकि 21 फीसदी ने मूंगफली के तेल, 18 फीसदी ने सरसों के तेल, नौ फीसदी ने नारियल का तेल, सात फीसदी ने वेजिटेबल और केनोला तेल, छह फीसदी ने तिल का तेल, चार फीसदी ने ऑलिव ऑयल, दो फीसदी पाम ऑयल के इस्तेमाल की बात कही है। सात फीसदी ने अन्य तेल इस्तेमाल करने की बात कही जबकि एक फीसदी कोई जवाब नहीं दे पाए। इस सर्वे रिपोर्ट से यह भी सामने आया कि भारतीय घरों में सबसे ज्यादा सूरजमुखी, मूंगफली और सरसों का तेल इस्तेमाल होता है।
सर्वे में तेल के बढ़ते दामों को लेकर 50 फीसदी लोगों का कहना है कि वह उतना ही खाद्य तेल इस्तेमाल कर रहे हैं जितना पहले करते थे लेकिन उसके लिए अपनी बचत में से बहुत अधिक कीमत चुका रहे हैं। वहीं, 17 फीसदी लोगों का कहना है कि उन्होंने तेल के इस्तेमाल में कमी नहीं कि है लेकिन गैर-जरूरी चीजों पर खर्च घटा दिया है। यह दिखाता है कि 67 फीसदी लोग अपने खर्चे या बचत घटाकर खाद्य तेल पर अधिक खर्च कर रहे हैं। जबकि 24 फीसदी लोगों ने कहा है कि उन्होंने खपत को घटा दिया है लेकिन खर्च तब भी उतना ही है जितना पहले था। 6 फीसदी लोगों को बढ़ी हुई कीमतों के बारे में पता नहीं था जबकि 3 फीसदी लोगों ने कोई जवाब नहीं दिया।