राजस्थान के बाद अब गुजरात के सरकारी अस्पतालों में नवजातों की मौतों की एक भयावह आंकड़ा सामने आया है। बीते दिसंबर महीने में भाजपा शासित गुजरात राज्य के राजकोट में 111 बच्चों और अहमदाबाद में 85 नवजात बच्चों की मौतें दर्ज की गई हैं।
सरकारी अस्पतालों में मौत का आंकड़ा सामने आने के बाद गुजरात सीएम विजय रूपाणी से जब इस पर सवाल किया गया तो वे बिना जवाब दिए ही चले गए। गौरतलब है कि रुपाणी का संबंध राजकोट जिले से है। मीडियाकर्मियों ने जब उनसे पूछा कि बच्चों की मौतों पर आपको क्या कहना है, रुपाणी बिना कोई उत्तर दिए चले गए। हालांकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल ने कहा कि राज्य में नवजात मृत्यु दर कम है और यह एक हजार बच्चों में केवल 30 है। कुपोषण, समय पूर्व जन्म या प्रसूताओं का समय से अस्पताल नहीं पहुंच पाना इसके कुछ प्रमुख कारण हैं।
यहां के डा. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज में दिसंबर महीने में 146 नवजातों की मौतें दर्ज की गई हैं। हालांकि अस्पताल के प्रमुख डा.एसएस राठौर ने कहा है कि अस्पताल में भर्ती बच्चों की तुलना में यह आंकड़ा कम है। इसके अलावा अस्पताल में दूसरे अस्पतालों से बहुत मुश्किल केस भी रैफर होते हैं। अस्तपाल में 4,689 बच्चे दिसंबर में भर्ती हुए और इनमें से केवल तीन प्रतिशत को बचाया नहीं जा सका।
कोटा के जेके लोन गवर्नमेंट हॉस्पिटल में तीन बच्चों की और मौत होने से कुल तादाद रविवार को 110 पर पहुंच गई। शनिवार को यह आंकड़ा 107 का था। राज्य सरकार की एक जांच समिति ने यहां पाया कि अस्पताल में बिस्तरों की संख्या में कमी है और इसमें सुधार किया जाना चाहिए।
बीकानेर के सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एचएस कुमार ने बताया कि, दिसंबर महीने में अस्पताल के आईसीयू में 162 बच्चों की मौत हुई है। लेकिन अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कोई लापरवाही नहीं बरती गई। बच्चों की जिंदगी बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है।