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स्वच्छता सुपर लीग में भी इंदौर नंबर-1: इन वजहों से 8वीं बार मारी बाजी; महापौर भार्गव ने हर चीज बारीकी से समझाई

सार

इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अमर उजाला डिजिटल से कहा कि इंदौर शहर की स्वच्छता की आदत और सफाई मित्रों जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है कि इंदौर स्वच्छता की सुपर लीग में भी पहले पायदान पर आया है।
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इंदौर फिर नंबर वन - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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मध्य प्रदेश का इंदौर लगातार सात बार देश के सबसे स्वच्छ शहर बनने का खिताब हासिल कर चुका है। इस बार इंदौर को स्वच्छता सर्वेक्षण 2024—25 की सुपर लीग में शामिल किया गया है। सुपर लीग में सिर्फ उन्हीं 23 शहरों को शामिल किया गया है, जो अब तक हुए सर्वेक्षणों में पहले, दूसरे या तीसरे स्थान पर रहे हैं। इंदौर ने सुपर लीग 2024—25 में भी बाजी मार ली है। इंदौर देश के सुपर साफ शहरों में पहले पायदान पर आया है, जबकि दूसरे स्थान पर गुजरात का सूरत, तीसरे स्थान नवी मुंबई रहा है। यह लगातार आठवीं बार है, जब इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर चुना गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इंदौर को सम्मानित किया। सम्मान समारोह में प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगम आयुक्त भी मौजूद रहे।

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इस खिताब को जीतने के बाद इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अमर उजाला डिजिटल से कहा कि इंदौर शहर की स्वच्छता की आदत और सफाई मित्रों जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है कि इंदौर स्वच्छता की सुपर लीग में भी पहले पायदान पर आया है। उन्होंने बताया कि इंदौर की स्वच्छता यात्रा सिर्फ एक प्रशासनिक प्रयास नहीं, बल्कि जनता की भागीदारी से मिली बड़ी सफलता है। आठवीं बार भी इंदौर को स्वच्छता में सिरमौर बना है। क्योंकि यह केवल संकल्प नहीं, बल्कि पूरे शहर की सामूहिक शक्ति का प्रमाण है। प्रस्तुत है उनसे खास बातचीत के प्रमुख अंश–
 
अमर उजाला डिजिटल से चर्चा में इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा, इस पुरस्कार के असली हकदार इंदौर के नागरिक और हमारी नगर निगम की टीम है। सभी लोगों की लग्न और मेहनत का परिणाम है कि इंदौर एक बार फिर से स्वच्छता में सिरमोर बना है। इस बार भारत सरकार ने इंदौर और इंदौर सहित कुछ अन्य बड़े शहरों को अलग लीग में रखा था इस लीग में हम देश के अन्य शहरों से आगे निकल गए है। आज इंदौर देश में स्वछता का संदेश देने वाला गुरु बन गया है।
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महपौर भार्गव कहते है कि आने वाले दिनों में इंदौर मार्गदर्शक की भूमिका रहेगा। इंदौर सहित अन्य शहरों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाएगा। क्योंकि इंदौर ने स्वच्छता में कई नवाचार भी किए है जो देश किसी भी शहर में नहीं हुए हैं। इसलिए हम दूसरे शहरों से आगे है। इंदौर जीरो वेस्ट वार्ड, सेल्फ सस्टेनेबल जोन जैसे नए इनिशिएटिव्स पर काम रहा है। जनता को और ज्यादा जागरूक किया जा रहा है कि वे अलग अलग कचरा सही समय पर दें, ताकि कचरे की प्रोसेसिंग प्रभावी ढंग से हो सके। अब शहर में आन डिमाड कचरा कलेक्शन की भी शुरुआत हो चुकी है।

भार्गव बताते है, आने वाले दिनों में इंदौर नगर पालिका निगम ने रिड्यूस, रियूस और रिसायकल को अब रिप्रोड्यूस के स्तर तक ले जाने का फैसला किया है। इसका मतलब यह है कि हम कचरे से नई उपयोगी चीजें बनाएंगे। जैसे, जैविक कचरे से खाद, प्लास्टिक और अन्य अनुपयोगी वस्तुओं को रिसाइकल कर नए उत्पाद बनाए जा रहे हैं। इससे न केवल कचरे का सही उपयोग होगा, बल्कि शहर के लिए रेवेन्यू भी जेनरेट होगा।

महापौर ने कहा कि आने वाले दिनों मे इदौर निगम निगम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में उनके स्वच्छता के सपने को पूरा करने के लिए सहयोगी बनेगा। इंदौर और वाराणसी नगर निगम के बीच सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए मिलकार काम करेगे। हम मिलकर मंदिरों, गंगा घाट आदि स्थानों की साफ सफाई में इंदौर का स्वच्छता मॉडल लागू करेगे।वहीं,इंदौर नगर निगम वाराणसी को स्वच्छ बनाने के लिए नगर निगम को प्रशिक्षित करेगा।  

उन्होंने कहा, नगर निगम ने इस बार शहर के ब्यूटीफिकेशन पर भी विशेष ध्यान दिया है। जिन जगहों से शहर की सुंदरता प्रभावित हो रही थी उन सभी जगहों पर निगम ने पेंट करवाना, क्रिएटिव चीजें बनवाना, दीवारों, मकानों पर स्लोगन लिखवाना जैसे काम किए। शहर के चौराहों, बस स्टैंड, एयरपोर्ट और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के प्रमुख स्थलों पर खास साज सज्जा की गई। इस बार निगम ने शहर की सड़कों पर बने लिटरबिन से नियमित कचरा उठाने पर भी विशेष जोर दिया। शहर की सड़कों की सफाई के लिए विदेशों से मशीनें बुलवाई गई।

मेयर भार्गव के मुताबिक, इंदौर निगम ने जीरो लैंड फ्री सिटी की ओर भी अपने कदम बढ़ा दिए हैं। प्रोसेसिंग के बाद भी 5 प्रतिशत सूखा कचरा बच जाता है, जो किसी काम का नहीं होता। उसे जमीन के नीचे लेयर बनाकर दबा दिया जाता है। कचरा, मिट्टी, कचरा, मिट्टी इस तरह से लेयर बनाई जाती है। इसे लैंड फीलिंग कहते हैं। निगम की कोशिश है कि इस 5 प्रतिशत बचने वाले सूखे कचरे से भी एनर्जी तैयार की जाए और इंदौर को जीरो लैंड फ्री सिटी बनाया जाएगा। इंदौर मध्यप्रदेश का पहला शहर है, जिसने ट्रीटेड वाटर बेचने की शुरुआत की है। शहरवासी 311 एप पर कॉल कर ट्रीटेड वाटर मंगवा कर भवन निर्माण में इसका उपयोग कर सकते हैं। इस तरह निगम के लिए घरों में बाथरूम और किचन से निकलने वाला गंदा पानी भी कमाई का जरिया बन गया है।

उन्होंने कहा, अभी तक इंदौर के लिए यह दूषित पानी समस्या बनता था, लेकिन निगम ने रिसाइकिल कर पानी को बेचने की शुरुआत की। शहर में मेट्रो प्रोजेक्ट का निर्माण कर रही दो कंपनियों ने रोजाना एक लाख लीटर पानी नगर निगम से खरीदा। निगम ने कंपनियों को 1.40 रुपए प्रति हजार लीटर के हिसाब से पानी बेचा। कबीट खेड़ी में 160 एमएलडी क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट है। शहर में हर दिन 300 एमएलडी पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है। आज एशिया का सबसे बड़ा बायो सीएनजी प्लांट देश में सिर्फ इंदौर के पास है। इसे देखने के लिए न सिर्फ देश बल्कि दुनिया के अन्य देशों से भी प्रतिनिधिमंडल आ चुके हैं। नगरीय आवास व विकास मंत्रालय इसे देशभर में लागू करने के निर्देश भी दे चुका है। 'वेस्ट टू वेल्थ' का ये एक अच्छा उदाहरण है।

2017 से इंदौर पहले नंबर पर आ रहा
स्वच्छ सर्वेक्षण में वर्ष 2017 से इंदौर पहले नंबर पर आ रहा है। इंदौर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कह चुके हैं कि दूसरे शहर जब कुछ करने का सोचते हैं, तब तक इंदौर वह काम कर चुका होता है। यह बात स्वच्छता को लेकर भी सही साबित हुई है। इंदौर के जनभागीदारी मॉडल की देशभर में तारीफ होती है। नवाचारों की सीरीज, आपसी समन्वय और कुछ नया करने का जज्बा हमें दूसरे शहरों से आगे रखता है। आज जब दूसरे शहर पहले, दूसरे और तीसरे स्थान के लिए जिद्दोजहद में लगे हैं। इंदौर लगातार सात वर्ष अव्वल रहकर खास पायदान पर पहुंच चुका है।

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