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किसानों को मालामाल करेगा 'विदेशी' गन्ना, लंबाई-वजन जानकर रह जाएंगे हैरान

Wed, 07 Sep 2016 04:20 AM IST
देवेंद्र कुमार/ अमर उजाला, सहारनपुर
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- फोटो : amarujala
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चार वर्ष पहले इंडोनेशिया से लाए गए गन्ने के दो टुकडे़ ग्राम दीवालहेड़ी में धूम मचा रहे हैं। नवंबर में बोए गए इस गन्ने की फसल की लंबाई करीब 20 फुट और एक गन्ने का वजन लगभग 4 से 5 किलो है। अधिक लंबाई होने के चलते इस गन्ने को कई स्थानों से सीढ़ी लगाकर बांधने के अलावा बांसों का सहारा देकर गिरने से रोका गया है।
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आधा बीघा खेत में खड़ा यह गन्ना क्षेत्रवासियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ग्राम दीवालहेड़ी के किसान अनिल सिंह के चाचा मदनपाल सिंह इंडोनेशिया में टैक्सटाइल इंजीनियर है। वे वहां से करीब चार वर्ष पहले गन्ने की दो कांछी (टुकडे़) को लेकर आए थे। अनिल ने उन टुकड़ों की अपने खेत में बुवाई की।

इनमें से अंकुरित हुए एक आंख से चार वर्ष में उन्होंने करीब आधा बीघा गन्ना तैयार कर लिया। हालांकि उन्हें गन्ने की इस प्रजाति का नाम तक मालूम नहीं है। ट्रेंच विधि से 11 नवंबर में बोए गए इस गन्ने की लंबाई इस समय 20 फुट है और एक गन्ने का वजन 4 से 5 किलो के करीब है।
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बांसों के सहारे गिरने से रोकी गन्ने की फसल 

फाइल फोटो - फोटो : Getty

अनिल सिंह ने बताया कि उन्होंने इंडोनेशियन प्रजाति के गन्ने को सीढ़ी लगाकर बंधवाया गया है। लंबाई अधिक होने से इस गन्ने को बांसों के सहारे गिरने से रोका गया है। गन्ने की इस प्रजाति में बीमारियों का प्रकोप भी कम है और यह भारतीय प्रजातियों की तरह स्वादिष्ट और मीठा है। उन्हें आधा बीघा में इस गन्ने का उत्पादन 100 से 125 क्विंटल मिलने की उम्मीद है। 

ग्राम दीवालहेडी के एक किसान के बोया गया इंडोनेशियन प्रजाति का गन्ने लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने इसे ट्रेंच विधि से बोया है। जो खेत काफी तगड़ा खड़ा है। हम गन्ना शोध संस्थान और चीनी मिलों से इसमें शुगर की मात्रा आदि की जल्द ही जांच कराएंगे। यदि शर्करा की मात्रा उचित पाई गई तो यह प्रजाति किसानों के लिए वरदान साबित होगी। 
- डॉ. आरडी द्विवेदी, जिला गन्ना अधिकारी 

यह इंडोनेशियन प्रजाति गन्ने में प्रजातीय प्रजनन सुधार में कारगर साबित होगी। इसकी लंबाई, मोटाई बढ़िया होने के साथ ही यह रोग रोधी भी है लेकिन चीनी की मात्रा सामान्य से थोड़ी कम है। इसमें सुधार का बढ़िया वैराइटी तैयार की जा सकती है।
- डॉ. विकास मलिक, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र
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