सीमा वार्ता के बाद बीजिंग में भारतीय दूतावास की ओर से जारी बयान के मुताबिक, डोभाल और चीनी स्टेट काउंसलर के बीच बातचीत सार्थक रही। भारत और चीन ने सीमा विवाद के मुद्दों का निष्पक्ष, उचित और परस्पर स्वीकार्य समाधान खोजने के प्रयासों में तेजी लाने का संकल्प लिया। इस दौरान डोभाल और वांग ने सीमा से जुड़े प्रश्न पर भारत और चीन के रणनीतिक दृष्टिकोण के महत्व को भी रेखांकित किया। इस शीर्ष स्तरीय वार्ता से चार दिन पहले चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा था, ‘भारत और चीन के संबंधों में मजबूती आई है'।
दोनों पड़ोसी देशों ने अपने मतभेदों को बातचीत के माध्यम से दूर करने का प्रयास किया है। इतना ही नहीं, सभी क्षेत्रों में सहयोग भी बढ़ा है।’ भारत और चीन के बीच 3488 किमी लंबी सीमा को लेकर विवाद है। यहां तक कि चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता रहा है, जबकि भारत उसके इस दावे को हमेशा खारिज करता है। इसी वजह से चीन अरुणाचल में किसी भी शीर्ष भारतीयों नेता के दौरे पर अपना विरोध दर्ज कराता है।