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सेहत: नींद सुधारने के लिए कृत्रिम उपाय बन सकते हैं बड़ा खतरा, मेलाटोनिन सप्लीमेंट्स के प्रयोग से बढ़ा जोखिम

Sun, 10 Aug 2025 07:20 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

नेशनल जियोग्राफिक की रिपोर्ट और भारतीय विशेषज्ञों के विश्लेषण के आधार पर यह स्पष्ट हो रहा है कि मेलाटोनिन का अंधाधुंध सेवन स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकता है। भारत में इसका बाजार तेजी से फैल रहा है, परंतु विनियमन (रेगुलेशन) कमजोर है जिससे गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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दुनियाभर में नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या से परेशान लोग मेलाटोनिन सप्लीमेंट्स की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। यह हार्मोन जो शरीर में स्वाभाविक रूप से बनता है, नींद चक्र को नियंत्रित करता है और बाजार में आसानी से उपलब्ध है। लेकिन क्या इसे लगातार और कभी- कभी अधिक मात्रा में लेना सुरक्षित है।

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नेशनल जियोग्राफिक की रिपोर्ट और भारतीय विशेषज्ञों के विश्लेषण के आधार पर यह स्पष्ट हो रहा है कि मेलाटोनिन का अंधाधुंध सेवन स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकता है। भारत में इसका बाजार तेजी से फैल रहा है, परंतु विनियमन (रेगुलेशन) कमजोर है जिससे गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नेशनल जियोग्राफिक की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और कई अन्य देशों में मेलाटोनिन सप्लीमेंट्स का उपयोग पिछले कुछ वर्षों में कई गुना बढ़ा है। नींद विशेषज्ञों के अनुसार वयस्कों के लिए 0.5 से 5 मिलीग्राम तक की खुराक सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन बाजार में 10 मिलीग्राम या उससे अधिक खुराक वाले उत्पाद भी आसानी से उपलब्ध हैं।

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एम्स दिल्ली के स्लीप मेडिसिन विभाग के डॉ. विनय कुमार का कहना है,लोग इसे सुरक्षित नींद की गोली मानकर अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे प्राकृतिक नींद चक्र बिगड़ता है और लंबे समय में इसकी निर्भरता बढ़ सकती है जो अंततः शरीर के लिए नुकसानदेह है।

सिरदर्द, चक्कर और शारीरिक कमजोरी की दिक्कत
सप्लीमेंट का ज्यादा सेवन शरीर की सर्केडियन रिद्म (जैविक घड़ी) को बिगाड़ सकती है। बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल की नींद विशेषज्ञ डॉ. जोसेफ ओक्कुजोनी का कहना है कि मेलाटोनिन विटामिन नहीं बल्कि हार्मोन है। इसकी अधिक मात्रा से सिरदर्द, चक्कर और अगले दिन भारीपन महसूस हो सकता है। लंबे समय तक अथवा कम समय में अधिक मात्रा में इसका इस्तेमाल शारीरिक क्षमता को कमजोर कर शिथिल बना देता है। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि बच्चों में मेलाटोनिन का उपयोग केवल चिकित्सकीय सलाह पर ही होना चाहिए।
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भारतीय बाजार का आकार व संभावनाएं
मार्केट रिसर्च फर्मों की रिपोर्टों के अनुसार 2024 में भारत में मेलाटोनिन सप्लीमेंट्स का बाजार अनुमानित 320 से 350 करोड़ रहा, जिसमें पिछले पांच वर्षों में लगभग 14 से 16 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। कोविड-19 के दौरान नींद संबंधी समस्याओं और तनाव में वृद्धि के साथ, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर इसकी आसान उपलब्धता ने बिक्री को और बढ़ावा दिया। उद्योग विश्लेषकों के अनुसार, 2030 तक यह बाजार 650 से 700 करोड़ तक पहुंच सकता है, जिसका प्रमुख हिस्सा शहरी पेशेवरों और उपभोक्ताओं से आएगा।

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