1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद इंदिरा गांधी ने एक बड़ा फैसला लिया जिसकी वजह से बांग्लादेश के नागरिकों को खुली हवा में सांस लेने का मौका मिला। दरअसल, आजादी के बाद जब बंटवारा हुआ तो पाकिस्तान दो हिस्सों में बंट गया। एक पूर्वी पाकिस्तान तो दूसरा पश्चिमी पाकिस्तान (जो कि आज बंग्लादेश) था। पूर्वी पाकिस्तान के शासकों ने पश्चिमी हिस्से को कभी अपना नहीं माना। पाकिस्तानी सेना ने वहां के लोगों पर जुल्म ढाए। महिलाओं और बच्चों को बेदर्दी से काट दिया गया। आजादी मिलने के बाद भी दूसरी आजादी के लिए पश्चिमी पाकिस्तान के लोगों ने इंदिरा गांधी से मदद मांगी।
इंदिरा ने बड़ा फैसला लेते हुए पश्चिम पाकिस्तान को आजाद करने की दुनिया के सामने वकालत की। इंदिरा ने पाकिस्तानी सेना की तुलना हिटलर से की और फिर शुरू हुआ पश्चिमी एशिया में एक नए देश की आजादी का सफर। पाकिस्तानी सेना को धूल चटाने के बाद, पश्चिमी पाकिस्तान को आजाद राष्ट्र घोषित कर दिया गया। बंगाल की खाड़ी के किनारे बसे इस देश को आज दुनिया बांग्लादेश के नाम से जानती है।
18 मई 1974 का वो दिन रोज की तरह ही था। अचानक खबर आई कि परमाणु धमाका हुआ है तो सभी विश्व शक्ति सकते में आ गईं। बाद में खबर आई कि भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण कर दिया है। इंदिरा गांधी कि इस अहम फैसले से गरीब कहा जाने वाला भारत एक दम परमाणु शक्ति बन गया। भारत ने ये परमाणु परीक्षण उस वक्त किया जब अमेरिका वियतनाम युद्ध में उलझा हुआ था इसी लिए उसे कानों कान भनक तक नहीं लगी।
परमाणु परीक्षण के बाद अमेरिका इस बात से परेशान था कि उसकी खुफिया एजेंसियां कैसे इस परीक्षण का पता लगाने में चूक गईं। फिर उसने अपनी शक्ति का दबदबा बनाए रखने के लिए भारत पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए जिसे इंदिरा गांधी ने न केवल स्वीकार किया बल्कि उन चुनौतियों को पार भी किया।