ऐसे ही एक साक्षात्कार के दौरान बाला साहेब ठाकरे से पूछा गया था कि अगर वे देश के प्रधानमंत्री बन जाएं तो वे बांग्लादेशियों के साथ कैसा व्यवहार करेंगे? इस सवाल के जवाब में बाला साहेब ठाकरे ने कहा था कि अगर वे देश के प्रधानमंत्री बन जाते हैं तो वे अवैध बांग्लादेशियों को देश के बाहर निकाल देते। इनकी संख्या चाहे जितनी भी क्यों न हो।
इतिहासकार ने कहा- विकट है समस्या
जानकीदेवी मेमोरियल कॉलेज में इतिहास की प्रोफेसर मनीषा अग्निहोत्री ने अमर उजाला से कहा कि माना जाता है कि बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भारत में आए शरणार्थी वापस लौटकर अपने देश नहीं गए। वे यहीं बस गए। लाखों बांग्लादेशी ऐसे हैं जिनका जन्म ही 1971 के बाद भारत में हुआ है। वे अब तीस, चालीस और पचास साल की उम्र के हैं। इनकी समस्या है कि अब वे न तो बांग्लादेश के रह गए हैं और न ही असम के लोग और भारत उन्हें अपना मानने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि इन लोगों के सामने दोहरी समस्या है। वे यहां रहते हैं तो उनके सामने नागरिकता की समस्या है। अगर उन्हें किसी तरह भारत से वापस जाने की बात भी होती है तो बांग्लादेश उन्हें अपनाने के लिए कितना तैयार होगा, यह देखने वाली बात होगी। साथ ही, अगर ये लोग अगर बांग्लादेश वापस जाते भी हैं तो ये लोग वहां भी शरणार्थी जैसे बन जाएंगे क्योंकि इनमें से बहुत बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्हें आज की तारीख में जानने-पहचानने वाला बांग्लादेश में भी नहीं मिलेगा।