पद्मश्री विजेता भारती शिवाजी समेत देश के दिग्गज कलाकारों ने उन्हें आवंटित सरकारी आवास खाली करने के आदेश पर नाराजगी जताई है। कलाकारों ने कहा, सरकार के इस फैसले से वह अपमानित और दुखी महसूस कर रहे हैं। इस साल अक्तूबर में केंद्र सरकार ने पंडित बिरजू महाराज, पंडित भजन सोपोरी, जतिन दास, उस्ताद एफ वसीफुद्दीन डागर और रीता गांगुली समेत 27 कलाकारों को 31 दिसंबर तक दिल्ली में सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया था।
प्रसिद्ध मोहिनीअट्टम नर्तकी भारती शिवाजी ने कहा कि आदेश से वह अब तक सदमे की स्थिति में हैं। यह उत्पीड़न है। मेरे पास अलग से कोई जमीन या संस्थान नहीं है। मैं अपनी सारी गतिविधियां घर से करती हूं। लेकिन लगता है कि सरकार को पारंपरिक कला का कोई मूल्य नहीं है। कम से कम सरकार को पारंपरिक कला का संरक्षण करने के लिए जीतोड़ करने वाले कलाकारों को वैकल्पिक आवास मुहैया कराना चाहिए।
कुचिपुड़ी नर्तकी वनश्री राव ने कहा कि यह आदेश ऐसा है, जैसे हम अवैध रूप से यहां रह रहे हैं। आवास आवंटन के तीन साल बाद हमें 2014 तक विस्तार दिया गया। इसके बाद से हम सरकार के निर्देशानुसार इसका किराया दे रहे हैं। 2018 में सरकार ने बीते चार वर्ष के लिए आठ से नौ लाख रुपये पूर्वव्यापी किराया राशि भेजी, जिसका हम भुगतान कर रहे हैं। हर महीने हम 60 हजार तो कभी एक लाख रुपये किराया देते हैं क्योंकि इतनी बड़ी राशि एक साथ देना संभव नहीं है। मैं अपमानित महसूस कर रही हूं। 88 साल की उम्र में मुझे घर खाली करने को कहा जा रहा है, जहां मैं बीते 20 साल से रह रही हूं।