नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि ‘युद्धक’ श्रेणी के उपकरणों का स्वदेशी उत्पादन लगभग 45 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि यह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए एक बड़ा अवसर है जो उनके विनिर्माण को बढ़ा सकता है। ‘युद्धक’ श्रेणी के उपकरणों में हथियार और राडार शामिल हैं।
रियर एडमिरल एस एन अलमंडा ने एक वेबिनार में कहा, ‘भारतीय शिपयार्ड में पहले से ही 130 जहाज और पनडुब्बियां हैं। साथ ही हमारी गोदी में निर्माण के लिए 46 जहाजों और पनडुब्बियों का ऑर्डर दे दिया गया है। यह गर्व की बात है कि हमारे हितधारकों की मदद से ‘फ्लोट’ श्रेणी का लगभग 90 प्रतिशत उपकरण और मूव श्रेणी के 65 प्रतिशत उपकरण का स्वदेशी उत्पादन है।’
‘फ्लोट’ श्रेणी में जहाज के पेटे की संरचना और फिटिंग से जुड़ी सभी सामग्री, उपकरण और प्रणालियां शामिल होती हैं। मूव श्रेणी के उपकरणों में प्रचालन प्रणाली, ऊर्जा उत्पादन करने वाले टरबाइन इंजन, अग्निशमन प्रणाली शामिल होती है। ‘युद्धक’ या ‘फाइट’ श्रेणी के उपकरणों में पोत पर लगने वाले सभी हथियार और सेंसर आते हैं जिससे पोत की युद्धक क्षमता प्रभावित होती है।
अलमांडा ने कहा कि युद्ध श्रेणी में हमारा कुल स्वदेशी उत्पादन वर्तमान में लगभग 45 प्रतिशत के करीब है जिसमें हथियार, सेंसर, रडार और उन्नत स्टील्थ तकनीक शामिल है। उन्होंने पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित ‘भारतीय नौसेना की स्वदेशीकरण और आधुनिकीकरण आवश्यकताएं’ शीर्षक एक वेबिनार में कहा कि वास्तव में मैं इस प्रतिशत को एमएसएमई के लिए नौसेना में उनके योगदान को बढ़ाने के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखता हूं।