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Cyber Crime: जागरूक हो रहा भारत, लोगों ने 1000 दिन में 13 करोड़ बार 'साइबर क्राइम पोर्टल' की ली मदद

सार

Cyber Crime: साइबर क्राइम पोर्टल का लगभग 1000 दिनों में 13 करोड़ से अधिक बार उपयोग किया जा चुका है। पोर्टल पर अब तक 20 लाख से अधिक साइबर क्राइम की शिकायतें दर्ज की गई हैं। अगर इस संख्या का आंकलन दिनों के हिसाब से करें तो साइबर अपराध को लेकर प्रतिदिन 1826 शिकायतें आई हैं...
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Union Home Minister Amit Shah reviewed cyber security infra & functioning - फोटो : ANI
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विस्तार
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वैश्विक स्तर पर चाहे विकसित या विकासशील, कोई भी राष्ट्र हो, साइबर क्राइम, सभी के लिए एक बड़ी चुनौती के तौर पर सामने आ रहा है। भारत में साइबर अपराध से निपटने और लोगों को इसके खतरों से जागरूक कराने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अनेक कदम उठाए हैं। इसके मद्देनजर 10 जनवरी 2020 को साइबर अपराध से 'समन्वित और व्यापक' तरीके से निपटने के लिए 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C)' की स्थापना की गई थी। अब उसके सार्थक नतीजे आने लगे हैं। साइबर क्राइम पोर्टल का लगभग 1000 दिनों में 13 करोड़ से अधिक बार उपयोग किया जा चुका है। इसी से उक्त पोर्टल की विश्वसनीयता और उपयोगिता का पता चलता है। पोर्टल पर अब तक 20 लाख से अधिक साइबर क्राइम की शिकायतें दर्ज की गई हैं। अगर इस संख्या का आंकलन दिनों के हिसाब से करें तो साइबर अपराध को लेकर प्रतिदिन 1826 शिकायतें आई हैं। इस आधार पर ही 40 हजार से अधिक एफआईआर दर्ज हो सकी हैं।

1.33 लाख से अधिक लोगों के साथ हुआ साइबर गबन

देश में साइबर अपराधों की रोकथाम और 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' यानी '14सी' की कार्यप्रणाली को लेकर मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी को देखते हुए, '1930' हेल्पलाइन नंबर, कार्ड ब्लाक करने जैसे कई सुविधाओं का वन पॉइंट सलूशन प्रदान करता है। इस पर 250 से अधिक बैंक और वित्तीय मध्यस्थ ऑनबोर्ड हो चुके हैं। इसके माध्यम अब तक 1.33 लाख से अधिक लोगों से साइबर अपराधियों द्वारा गबन किए गए 235 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली हुई है। इसके अलावा टॉप 50 साइबर अटैक के मामलों को लेकर सामने आई मोडस ऑपरेंडी पर एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तैयार की गई है। अमित शाह का कहना था कि साइबर सुरक्षा एक साझा उत्तरदायित्व है। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए कि हमारी डिजिटल दुनिया, सभी के लिए सुरक्षित और संरक्षित हो। पीएम नरेंद्र मोदी, पहले ही कह चुके हैं कि साइबर सुरक्षा अब केवल डिजिटल दुनिया तक ही सीमित नहीं है, बल्कि  यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बन गया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों के चलते 500 से अधिक एप बैन

केंद्रीय गृह मंत्रालय में 2017 में साइबर और सूचना सुरक्षा (सीआईएस) प्रभाग बनाया गया था। इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशन में 10 जनवरी 2020 को साइबर अपराध से समन्वित और व्यापक तरीके से निपटने के लिए 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C)' की स्थापना की गई। इसके अंतर्गत सात संस्थाएं/प्लेटफॉर्म्स भी लांच किए गए। इनमें नेशनल साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिकल यूनिट, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, नेशनल साइबर क्राइम फॉरेंसिक लेबोरेटरी, नेशनल साइबर क्राइम ट्रेनिंग सेंटर, ज्वाइंट साइबर क्राइम इन्वेस्टीगेशन टास्क फोर्स, साइबर क्राइम इकोसिस्टम मैनेजमेंट यूनिट, नेशनल साइबर क्राइम रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल शामिल हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने 17 अगस्त 2022 को एनएएफआईएस की शुरुआत की है। इसके तहत अब तक एक करोड़ (1,05,80,266 रिकार्ड्स) से अधिक रिकॉर्ड को इंटीग्रेट किया जा रहा है। 31 जनवरी 2023 तक फिंगरप्रिंट्स को अब तक 23,378 बार चेक किया जा चुका है।

क्राइम रोकने और जांच कार्य में मिल रही मदद

क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम यानी 'सीसीटीएनएस' का भरपूर इस्तेमाल हो रहा है। क्राइम रोकने और जांच कार्य में इस सिस्टम से बड़ी मदद मिल रही है। देश के 16,625 पुलिस थानों में सीसीटीएनएस लागू कर दिया गया है। मौजूदा स्थिति में 99.9% पुलिस स्टेशन (16,597) सीधे सीसीटीएनएस पर सौ फीसदी केस दर्ज कर रहे हैं। इसके राष्ट्रीय डाटाबेस में अब तक 28.98 करोड़ पुलिस रिकॉर्ड हुए हैं। नागरिकों की ओर से 12.82 करोड़ से अधिक सेवा अनुरोध प्राप्त हुए हैं। इनमें से 12.35 करोड़ अनुरोधों का राज्य पुलिस द्वारा निपटान किया गया है। इसके साथ ही इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) का उपयोग किया जा रहा है। इसके मुख्य स्तंभों को गृह मंत्रालय द्वारा स्वतंत्र साइलो के रूप में विकसित किया गया था, जैसे कि सीसीटीएनएस के रूप में ई-पुलिस, ई-कोर्ट, ई-जेल, ई-फोरेंसिक और ई-अभियोजन आदि। ई-पुलिस, सीसीटीएनएस के रूप में सौ फीसदी पुलिस स्टेशनों में लागू है। ई-फोरेंसिक एप्लीकेशन को 117 फोरेंसिक लैब में लागू किया गया है। 1300 जेलों में ई-जेल सिस्टम लागू है। ई-अभियोजन आवेदन, 751 अभियोजन जिलों में लागू किया गया है।

30 हजार पुलिस कर्मियों को मिला है प्रशिक्षण

नेशनल साइबर फोरेंसिक लेबोरेटरी (जांच) के माध्यम से, अभी तक, राज्यों को पांच हजार से अधिक फॉरेंसिक सेवाएं प्रदान की गई हैं। 30 हजार पुलिस कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और अभियोजकों को साइबर अपराध जागरूकता, जांच, फोरेंसिक, आदि को लेकर प्रशिक्षण दिया गया है। 'साइट्रेन' नामक व्यापक ओपन ऑनलाइन पाठ्यक्रम (एमओओसी) प्लेटफॉर्म पर अभी तक, 31000 से अधिक पुलिस अधिकारियों को पंजीकृत किया गया है। 8000 से अधिक प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं। मोदी सरकार ने कमान संभालते ही इनफार्मेशन और डाटा सिक्योरिटी क्षेत्र में कोआर्डिनेशन, एक्सचेंज व शेयरिंग को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई थी। इसके तहत साइबर अपराधों की रियल-टाइम रिपोर्टिंग, फोरेंसिक प्रयोगशाला नेटवर्क, कैपेसिटी बिल्डिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, साइबर स्पेस की साइबर हाइजीन सुनिश्चित करना और साइबर जागरूकता, जैसे विषयों में काम किया गया है। इसके अतिरिक्त, विदेशी मूल के अपराधों का राष्ट्रीय डाटाबेस यानी 'एनडीओएफओ' भी तैयार किया गया है। भारत में अपराध में शामिल विदेशियों की एक रजिस्ट्री, यह सेवा 20 जनवरी 2023 को शुरू की गई है। यह सभी विदेशी अपराधियों के संबंधित डाटा के लिए एक-स्टॉप समाधान है। यह प्रणाली सभी पुलिस स्टेशनों और लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों के लिए उपलब्ध है। इसका लाभ नागरिक भी उठा सकते हैं। जैसे वैवाहिक विवाद, वीजा धोखाधड़ी, अवैध आप्रवासन, नाइजीरियाई लॉटरी और अन्य साइबर अपराधों, मसलन विदेशियों द्वारा उनके खिलाफ किए गए अपराधों में कमी के माध्यम से नागरिक लाभान्वित होते हैं।

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