गेहूं के कंसाइनमेंट को लेकर विवाद।
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हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा था कि तुर्की ने भारत से भेजे गए 17 लाख टन गेहूं को खराब क्वालिटी का हवाला देते हुए लेने से इनकार कर दिया है। कहा गया था कि तुर्की के इस फैसले की वजह से भारत का लाखों टन गेहूं विभिन्न बंदरगाहों पर अटक गया। इसके बारिश में खराब होने की आशंका जताई गई थी। खुद भारत के खाद्य सचिव ने इस मामले की जांच की बात कही थी। हालांकि, अब इस गेहूं को भेजने वाली कंपनी आईटीसी का बयान आया है। आईटीसी के अधिकारियों की ओर से जो खुलासा किया गया है, उससे इस पूरे मामले को ही नया एंगल मिल गया है।
दरअसल, आईटीसी के सीईओ रजनीकांत राय ने एक मीडिया संस्थान को दिए इंटरव्यू में साफ किया है कि क्वालिटी के मानकों पर उनकी ओर से भेजे गए गेहूं का कंसाइनमेंट उच्च स्तर का था। राय ने बताया कि 55 हजार टन का कंसाइनमेंट नीदरलैंड की एक फर्म ईटीजी कमोडिटीज को बेचा गया था। ईटीजी ने इस कंसाइनमेंट की क्वालिटी जांच का जिम्मा स्विस कंपनी एसजीएस को सौंपा। उन्होंने बताया कि आईटीसी ने मई के मध्य में यह कंसाइनमेंट भेज दिया था। लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि ईटीजी ने इस कंसाइनमेंट को लेने के बाद इसका सौदा तुर्की के खरीदार से कर लिया।
आईटीसी सीईओ ने कहा कि ईटीजी के ही शिपमेंट को तुर्की की तरफ से न लिए जाने की खबर हमें मिली। हालांकि, इस पूरे कंसाइनमेंट का पेमेंट आईटीसी और खरीदार-विक्रेता कंपनी ईटीजी को मिल चुका है। राय ने कहा कि तुर्की की तरफ से जो कंसाइनमेंट अस्वीकृत कर दिया गया, उसे न लेने की वजह कभी नहीं बताई गई। उन्होंने साफ किया कि गेहूं को रुबेला वायरस या किसी और वजह से अस्वीकृत कर दिया गया और तुर्की-मिस्र ने कंसाइनमेंट को रिजेक्ट कर दिया, सिर्फ अफवाहें हैं।
मिस्र की ओर से गेहूं के किसी कंसाइनमेंट को अस्वीकृत करने की खबरों पर आईटीसी के प्रमुख ने कहा कि हमारा शिप कभी मिस्र गया ही नहीं। यह शिप अभी इस्राइल के एक बंदरगाह पर है और वहां माल उतरवाने की प्रक्रिया पूरे होने का इंतजार किया जा रहा है। राय ने इस बयान के जरिए इशारा किया कि कंसाइनमेंट के लिए नया खरीदार ढूंढ लिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि आईटीसी इस कंसाइनमेंट को पहले कहां भेज रहा था और इसके लिए नए खरीदार की जरूरत क्यों पड़ी?