अरब सागर में पाकिस्तानी युद्धपोत पीएनएस हुनैन भारतीय जहाज से टकराया। भारत ने राजनयिक को तलब कर 1991 के समझौते के उल्लंघन पर दी सख्त चेतावनी। जानें पूरा मामला।
अरब सागर में भारत के नौसैनिक जहाज से एक पाकिस्तानी युद्धपोत के टकराने की घटना को लेकर विदेश मंत्रालय ने नाराजगी जाहिर की है। विदेश मंत्रालय ने इस मामले में अपना विरोध दर्ज कराने के लिए पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक को तलब किया। इतना ही नहीं भारत की तरफ से पाकिस्तान में स्थित दूतावास को भी उनके विदेश मंत्रालय के सामने भी अरब सागर के इस टकराव का मुद्दा उठाने और ऐसी घटनाओं का विरोध करने का निर्देश दिया गया।
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर भारत और पाकिस्तान के जहाजों के बीच ऐसी क्या घटना हुई कि विदेश मंत्रालय को मुद्दे को राजनयिक स्तर पर उठाना पड़ा है? केंद्र की तरफ से पाकिस्तान के सैन्य इकाइयों को क्या चेतावनी दी गई है? भारत सरकार ने पाकिस्तान को जिस 35 साल पुराने नियम की याद दिलाई है, वह क्या है? यह पीएनएस हुनैन क्या है और यह कितना खतरनाक है? इसके अलावा पहले कब-कब अरब सागर में पाकिस्तान ने इसी तरह की नापाक हरकतों से भारत को भड़काने की कोशिश की है? आइये जानते हैं...
पहले जानें- 15 सितंबर को भारत-पाकिस्तान के जहाजों के बीच क्या हुआ?
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जिस घटना को लेकर लेकर विरोध दर्ज कराया गया है, वह मंगलवार (15 सितंबर) की शाम की है।
उत्तरी अरब सागर में ओमान तट से लगभग 220 किमी पूर्व अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाजों के बीच टक्कर की एक घटना हुई।
अरब सागर में टकराव।
- फोटो : अमर उजाला
केंद्र की तरफ से पाकिस्तान के सैन्य इकाइयों को क्या चेतावनी दी गई है?
विदेश मंत्रालय ने समुद्र में पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के इस व्यवहार को पूरी तरह से अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर करार दिया है।
पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक को तलब कर स्पष्ट तौर पर कहा गया कि वे सैन्य इकाइयों के संबंधित अफसरों को समुद्र में संचालन के दौरान सावधानी बरतने के लिए कहें।
पाकिस्तान से कहा गया कि उसकी सैन्य इकाइयां दोनों देशों के बीच हुए द्विपक्षीय समझौतों का सम्मान करें और उनके प्रावधानों का ढंग से पालन करें।
इसी के साथ भारत ने पाकिस्तान को भविष्य में इस तरह की खतरनाक घटनाओं की दोबारा होने से रोकने का भी स्पष्ट संदेश दिया।
केंद्र ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय कार्यवाहक राजदूत को निर्देश दिया कि वे पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने मामले में औपचारिक और कड़ा विरोध दर्ज कराएं।
क्या है वह 35 साल पुराना नियम, जिसका जिक्र कर भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी?
भारत सरकार ने पाकिस्तान को अप्रैल 1991 में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय समझौते की याद दिलाई है, जिसके तहत अरब सागर में दोनों देशों को किसी भी तरह के सैन्य अभ्यास, गतिविधि या सैन्य बेड़े की तैनाती को लेकर पहले से जानकारी देनी होती है की याद दिलाई है और इसका पालन करने के लिए कहा गया है। इसे एग्रीमेंट ऑन एडवांस नोटिस ऑफ मिलिट्री एक्सरसाइज, मैन्युअर्स एंड ट्रूप मूवमेंट्स (Agreement on Advance Notice of Military Exercises, Manoeuvres and Troop Movements) के अनुच्छेद 10 की याद दिलाई है।
अरब सागर में भारत-पाकिस्तान के टकराव को टालने के नियम क्या?
समझौते के अनुच्छेद 10 के मुताबिक, जब भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाज या पनडुब्बियां अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में तैनात हों, तो उन्हें दुर्घटनाओं से बचने के लिए एक-दूसरे से कम से कम 3 समुद्री मील (लगभग 5.56 किलोमीटर) की सुरक्षित दूरी बनाए रखनी अनिवार्य है।
इस प्रावधान को दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने और समुद्र में एक-दूसरे की सैन्य गतिविधियों का गलत अर्थ या गलतफहमी निकालने से रोकने के लिए शामिल किया गया था।
इस नियम को लागू करने का मकसद अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच किसी भी बेवजह के टकराव या खतरनाक आमने-सामने की स्थिति को टालना है।
गौरतलब है कि 15 सितंबर की घटना में पाकिस्तानी नौसैनिक पोत पीएनएस हुनैन ने तीन समुद्री मील के इस बफर ज़ोन का उल्लंघन करते हुए तेज गति से भारतीय युद्धपोत के बेहद करीब आकर असुरक्षित पैंतरेबाजी की, जिससे दोनों पोत आपस में टकरा गए।
क्या है पाकिस्तान का पीएनएस हुनैन, जिसने घटना को दिया अंजाम?
पीएनएस हुनैन (एफ-273) पाकिस्तान नौसेना का आधुनिक यारमुक-क्लास ऑफशोर पेट्रोल वेसल (कॉरवेट) है।
निर्माण और कमीशनिंग
इस पोत का निर्माण रोमानिया के गलाशिया स्थित डामेन शिपयार्ड्स की ओर से किया गया है।
इसे जुलाई 2024 में पाकिस्तान नौसेना में शामिल किया गया था।
यह यारमुक-क्लास बैच II-ओपीवी 2600 डिजाइन का तीसरा जहाज है।
पीएनएस हुनैन।
- फोटो : अमर उजाला
पीएनएस हुनैन को मुख्य रूप से तटीय सुरक्षा, लंबी दूरी की गश्त, और खोज व बचाव अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है। यह जहाज पहले अरब सागर में पनामा ध्वज वाले मालवाहक पोत एमवी गोल्ड ऑटम से 18 विदेशी नाविकों को सुरक्षित बचाने के रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए चर्चा में आया था।
पीएनएस हुनैन।
- फोटो : अमर उजाला
अरब सागर में पाकिस्तान ने पहले कब-कब की भारत के खिलाफ नापाक हरकत?
अरब सागर और उससे सटे समुद्री क्षेत्रों में भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के बीच पहले भी कई बार असुरक्षित पैंतरेबाज़ी, उकसावे और टकराव की स्थितियां बन चुकी हैं।
2011: आईएनएस गोदावरी और पीएनएस बाबर की टक्कर
16 जून 2011 को अदन की खाड़ी/समुद्री क्षेत्र में सोमाली समुद्री डाकुओं से छुड़ाए गए मालवाहक पोत स्वेज के दौरान यह घटना हुई। भारतीय युद्धपोत आईएनएस गोदावरी जब व्यापारिक पोत के पास पहुंचा, तो पाकिस्तान के नौसैनिक जहाज पीएनएस बाबर ने पीछे से तेज गति से आकर असुरक्षित पैंतरेबाजी की। इस दौरान दोनों जहाज आपस में टकरा गए, जिससे आईएनएस गोदावरी के हेलीकॉप्टर डेक की सुरक्षा जाली को मामूली नुकसान हुआ था। भारत ने इस पर 1991 के द्विपक्षीय समझौते और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के उल्लंघन का कड़ा विरोध जताया था।
1999: अटलांटिक विमान घटना
कारगिल युद्ध के तुरंत बाद अगस्त 1999 में, पाकिस्तान नौसेना के अटलांटिक समुद्री गश्ती विमान ने कच्छ के रण (अरब सागर के तटीय क्षेत्र) में भारतीय हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया था। भारतीय वायु सेना के मिग-21 जेट ने इसे मार गिराया था, जिसमें सवार सभी 16 पाकिस्तानी सैन्यकर्मी मारे गए थे।
1996: हवा में हेलीकॉप्टरों का आमना-सामना
1996 में अरब सागर में पाकिस्तान नौसेना के 'सी स्पार्क' अभ्यास के दौरान गश्त कर रहे पाकिस्तान नौसेना के अल्यूट हेलीकॉप्टर और भारतीय नौसेना के सी किंग हेलीकॉप्टर के बीच हवा में टकराने जैसी खतरनाक स्थिति बन गई थी।
1995: भारतीय युद्धपोत के ऊपर खतरनाक उड़ान
1995 में इंडोनेशिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा के दौरान पाकिस्तान नौसेना के अलुएट हेलीकॉप्टर ने भारतीय नौसैनिक जहाज के ऊपर बेहद कम ऊंचाई पर असुरक्षित तरीके से उड़ान भरी थी।