भारत के किशोर बाकी दुनिया के किशोरों से कहीं ज्यादा सक्रिय हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक अध्ययन में कहा गया है कि लड़कियों में बढ़ते घरेलू कामकाज और लड़कों में खेलकूद जैसे कारणों से उनकी शारीरिक सक्रियता ज्यादा है।
वैश्विक और क्षेत्रीय रुझानों के आकलन के लिए अपनी तरह के पहले ऐसे अध्ययन में 11 से 17 वर्ष के किशोर-किशोरियों को शामिल किया गया है। अध्ययन में कहा गया है कि दुनिया के करीब 80 फीसदी किशोर रोजाना 60 मिनट से भी कम गतिविधि करते हैं। गौरतलब है कि विशेषज्ञ रोजाना कम से कम 60 मिनट व्यायाम, खेलकूद जैसी शारीरिक गतिविधियां करने की सलाह देते हैं।
इस रिपोर्ट में 2001-16 तक पढ़ाई करने वाले 146 देशों के छात्र-छात्राओं के आंकड़े लिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि टोंगा, समोआ, अफगानिस्तान और जाम्बिया को छोड़कर अन्य देशों में लड़कियां लड़कों के मुकाबले कम सक्रिय रहीं।
यह रिपोर्ट लांसेट चाइल्ड एंड एडॉलसेंट हेल्थ जर्नल में प्रकाशित की गई है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन के शोधकर्ताओं ने पेश किया है। इसमें कहा गया है कि रोजाना एक घंटा शारीरिक गतिविधियों की सलाह के पैमाने पर 85 फीसदी लड़कियां खरी नहीं उतरीं, वहीं 78 फीसदी लड़के एक घंटा से कम गतिविधियां करते हैं।
फिलीपींस, दक्षिण कोरिया के बच्चे सबसे ज्यादा आलसी
अध्ययन में फिलीपींस और दक्षिण कोरिया के बच्चे सबसे ज्यादा निष्क्रिय पाए गए। फिलीपींस में 93 फीसदी लड़कों और दक्षिण कोरिया में शोधकर्ताओं को 97 फीसदी लड़कियों में व्यायाम की बेहद कमी दिखाई दी। वहीं उच्च आय वाले यूरोपीय देशों और दक्षिण अफ्रीका के अलावा बड़ी आबादी वाले भारत, अमेरिका और बांग्लादेश में लड़के ज्यादा शारीरिक गतिविधियों वाले मिले। वहीं बांग्लादेश और भारत में लड़कियां सबसे ज्यादा सक्रिय दिखीं।