भारतीय वैज्ञानिकों के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय टीम ने ब्लैक होल के चारों ओर अदृश्य चाहरदीवारी की पहचान से जुड़े ब्रह्मांडीय एक्स-किरणों के एक विशिष्ट साक्ष्य की खोज की है।
वैज्ञानिकों ने कहा, ब्लैक होल की कोई सतह नहीं होती, लेकिन यह चाहरदीवारी के दायरे में कैद होता है जिससे कोई चीज, यहां तक कि प्रकाश भी बचकर नहीं जा सकता और सब कुछ इसमें समा जाता है।
इन तारकीय द्रव्यमान वाले ब्लैक होल का अस्तित्व साबित करने के क्रम में वैज्ञानिकों ने कहा कि इन्हें न्यूट्रॉन तारों से अलग करने की आवश्यकता है, जो कठोर सतह के साथ ब्रह्मांड में सबसे घनी वस्तुओं के रूप में जाने जाते हैं।
अध्ययन में सेवानिवृत्त हो चुके उपग्रह ‘रोसी एक्स-रे टाइमिंग एक्सप्लोरर’ द्वारा जुटाए गए आंकड़ों की मदद ली गई और उपग्रह द्वारा देखी गईं ब्रह्मांडीय एक्स किरणों से अब तक के छोटे, लेकिन अत्यंत कठोर ब्लैक होल के मजबूत साक्ष्य का पता लगाया। यह खोज मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के सुदीप भट्टाचार्य सहित अन्य वैज्ञानिकों ने की है।