फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चीन के बंदरगाहों पर महीनों से फंसे भारतीय नाविक, विदेश मंत्रालय ने कहा- हम चीन के संपर्क में हैं

Thu, 17 Dec 2020 07:49 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
अनुराग श्रीवास्तव - फोटो : ANI
विज्ञापन

भारत सरकार चीन के बंदरगाहों पर महीनों से फंसे भारतीय नाविकों की मौजूदा स्थिति को लेकर चीन सरकार के साथ संपर्क में है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी। 

 
विज्ञापन


 भारतीय दूतावास ने चीन के बंदरगाहों पर महीनों से फंसे भारतीय नाविकों की मौजूदा स्थिति को लेकर चीन सरकार के साथ संपर्क में है। चीन के अधिकारियों की तरफ से बताया गया कि कोविड-19 की पाबंदियों के कारण फिलहाल नाविक दल के बदलाव की इजाजत नहीं दी जा रही है। इस बारे में जहाज की संचालक कंपनियों और कार्गो मंगवाने वाले रीसीवर पक्ष को भी बता दिया गया है। इस मामले के समाधान और मानवीय आधार पर नाविकों को परेशानियों के निदान के लिए हमारा चीन स्थित दूतावास चीनी प्रशासन के संपर्क में है।

बता दें कि कोरोना वायरस को लेकर चीन और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों में तनाव लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों के तनाव के चलते 40 से अधिक भारतीय जिंदगियां सांसत में पड़ गई हैं, जो बीते कई महीनों से चीन तट के करीब समंदर में नजरबंदी की हालत में हैं। ऑस्ट्रेलिया से कोयला लेकर पहुंचे भारतीय नाविक दल वाले दो जहाजों को चीन सरकार न तो माल उतारने दे रही है और न वापस लौटने दे रही है। वहीं भारत-चीन सीमा तनाव के उलझे तानेबाने ने भी समाधान की कोशिशों को पेचीदा कर रखा है।
विज्ञापन


गिरफ्तारी की चेतावनी दी गई 
उत्तरी चीन के कोफीडियन तट के पास अगस्त 2020 से अटके जहा अनास्तासिया के अधिकारी गौरव सिंह बताते हैं कि विभिन्न सरकारों के बीच उलझे इस मसले में अभी यह अनुमान लगाना भी मुश्किल है कि देश वापसी का रास्ता कब और कैसे निकलेगा। अनास्तासिया पर नाविक दल के 18 सदस्य हैं, जो सभी अपने परिवार के पास लौटना चाहते हैं, लेकिन चीन सरकार की पाबंदियों के चलते न तो जहाज कंपनी अपने नाविक दल को बदल पा रही है और ना ही उन्हें तट पर जाने की इजाजत दी जा रही है। इतना ही नहीं सख्त हिदायत है कि अगर जहाज को हटाकर किसी और जगह ले जाने की कोशिश की गई, तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

अगस्त से चीन में फंसे भारतीय 
अनास्तासिया पर मौजूद गौरव ने बताया कि उनका जहाज 16 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया के हे-पॉइंट से करीब 90 हजार टन कोयला लेकर रवाना हुआ था। जहाज अगस्त के पहले सप्ताह में उत्तरी चीन के कोफीडियन बंदरगाह पहुंचा तो बताया गया कि उसे ऑस्ट्रेलिया से लाए गए कोयले को उतारने की इजाजत नहीं है। साथ ही पोत को एंकरेज एरिया में खड़े रहने के लिए कह दिया गया जहां बीते चार महीनों से एक नजरबंदी की स्थिति में जहाज खड़ा है। हालत यह है कि मेडिकल जरूरतों के लिए भी तट पर जाने की इजाजत नहीं है।


जहाज अनास्तासिया की तरह ही कहानी भारतीय नाविक दल वाले जहाज जग आनंद की है, जो और भी पहले से जिंतांग तट के करीब लंगर डाले खड़ा है। मुंबई की द ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी का यह जहाज भी ऑस्ट्रेलिया से करीब डेढ़ लाख टन लेकर जून में चीन तट पर पहुंचा था।

जहाज पर मौजूद वीरेन्द्र सिंह भोसले ने बताया कि पूरा नाविक दल एक ट्रेड वॉर के बीच बंधक बनकर रह गया है। वहीं मामले में भारत में शिपिंग मंत्रालय, महानिदेशक शिपिंग, भारतीय दूतावास से लेकर चीन सरकार तक कई बार अपील करने के बाद भी अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। चालक दल के कई सदस्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और अवसाद से गुजर रहे हैं। जग आनंद पर मौजूद एक अन्य सदस्य सागर म्हात्रे कहते हैं कि उन्हें जहाज़ पर 12 महीने पूरे हो चुके हैं, लेकिन अभी तक वतन वापसी का कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा है।
विज्ञापन


इस बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन स्थित भारतीय दूतावास इस संबंध में चीनी प्रशासन से लगातार संपर्क में है।   
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें