देश में रेल दुर्घटनाओं में पिछले एक दशक में कमी देखी गई है। हादसों में यह कमी रेलवे के आधुनिकीकरण की वजह से आई है। रेल मंत्रालय ने शुक्रवार को लोकसभा में बताया कि पिछले 11 वर्षों में ट्रेन दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में गिरावट आई है। 2024-25 में केवल 18 मौतें दर्ज की गई, जबकि 2004-05 से 2013-14 के बीच दस साल की अवधि में 904 मौतें हुई थीं।
रेल मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार, 2014-15 में 135 ट्रेन दुर्घटनाएं हुई थी। जबकि 2024-25 में यह संख्या घटकर सिर्फ 31 रह गई है। 2004 से 2014 के बीच कुल 1711 दुर्घटनाएं दर्ज हुई थीं (औसतन 171 प्रति वर्ष)। इसकी की तुलना में 2025-26 (नवंबर 2025 तक) में यह आंकड़ा गिरकर मात्र 11 पर पहुंच गया है। जो भारतीय रेल सुरक्षा के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि है। रेल मंत्रालय का कहना है कि पिछले करीब एक दशक ट्रेन की सुरक्षा को लेकर कई काम हुए हैं। इसी का नतीजा है कि ट्रेन हादसों में बड़ी कमी आई है।
रेलवे का दावा है कि कवच तकनीक से दुर्घटनाओं में भारी कमी आई है। कवच तकनीक ट्रेनों के ऑटोमैटिक ब्रेकिंग, सिग्नल ओवेरन रोकने और टक्कर रोकने में बेहद कारगर सिद्ध हो रही है। इससे भविष्य में दुर्घटनाओं में और कमी आएगी। अब स्वदेशी कवच सिस्टम का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। कवच को चरणबद्ध तरीके से देशभर में लागू किया जा रहा हैं।
संसद में एक प्रश्न के जवाब में रेल मंत्रालय ने जानकारी दी, यात्रियों की सुरक्षा और रक्षा भारतीय रेल की शीर्ष प्राथमिकता है। दुर्घटनाएं रोकने के लिए चिन्ह्ति ब्लैक स्पॉट और संवेदनशील खण्डों की नियमित गश्ती रेलकर्मियों, रेलवे सुरक्षा बल, राजकीय रेलवे पुलिस और सिविल पुलिस द्वारा की जा रही है। कोहरा आशंकित क्षेत्रों में लोको पायलट को जीपीएस आधारित कोहरा सुरक्षा उपकरण दिए गए हैं। इस उपकरण से लोको पायलट सिग्नल और लेवल क्रॉसिंग गेट जैसे मुख्य स्थानों तक की दूरी जान सकते हैं। लेवल क्रॉसिंग गेट पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए दस हजार से क्रॉसिंग गेट पर लेवल क्रॉसिंग गेट इंटरलॉकिंग सुविधा दी गई है।
रेल मंत्री ने बताया कि हादसे कम होने की सबसे बड़ी वजह सेफ्टी पर खर्च का बढ़ना है। रेलवे ने बीते 10 वर्षों में ट्रेनों की सुरक्षा पर होने वाले बजट को बढ़ाकर 1.16 लाख करोड़ कर दिया है। जबकि यही वजह 2013-14 में मात्र 39 हजार करोड़ रुपये थी। सर्दी के मौसम में घने कोहरे में भी ट्रेनों के लेट न होने की बड़ी वजह बताई है। फॉग सेफ्टी डिवाइस 288 गुना बढ़ाए गए हैं। साल 2014 में सिर्फ 90 ट्रेनों में ये डिवाइस लगे थे, जिसे साल 2025 तक बढ़ाकर 25,939 कर दिया गया है।
ट्रेनों की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए 21 स्टेशनों पर सेंट्रलाइज्ड इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और ट्रैकिंग सर्कुटिक को पूरा कर लिया गया है। बीते चार महीने में इसे पूरा कर लिया गया है। आधुनिक सिग्नल, सिक्योरिटी फीचर्स एड किए गए हैं। ट्रेनों में कवच सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, ट्रैक सर्किटिंग बढ़ाए गए हैं। वहीं रेल पटरियों की निगरानी, गश्ती, दुर्घटना-बाहुल्य इलाकों में विशेष सतर्कता बढ़ाई गई है। आधुनिक तकनीक, सतत निगरानी और बढ़े हुए निवेश से रेल नेटवर्क की निगरानी और सुरक्षा बढ़ाई गई है।